नई दिल्ली: मणिपुर के सेनापति जिले में लगभग एक महीने से बंधक बनाए गए 14 कुकी युवकों को मंगलवार दोपहर नागा समूहों ने रिहा कर दिया। हालांकि, अभी भी छह लापता नागा युवकों के ठिकाने और उनकी स्थिति को लेकर संशय बरकरार है। ऐसा माना जा रहा है कि इन नागा लोगों को कुकी गुटों ने अगवा किया था।
इससे पहले नागा समूह इन 14 कुकी लोगों के बदले अपने छह लापता नागा युवकों की वापसी का दबाव बना रहे थे। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, रिहा किए गए सभी 14 कुकी लोग कांगपोकपी जिले के तफौ कुकी गांव के रहने वाले हैं और उन्हें सुरक्षित उनके घर छोड़ दिया गया है। इस बीच, छह लापता नागा युवकों की सघन तलाश पुलिस द्वारा जारी है।
तफौ गांव के मुखिया लेनखोमांग चोंगलोई ने बताया कि पुलिस, सुरक्षा बलों और प्रशासन की संयुक्त टीम ने इन युवकों को उन्हें सौंपा। इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी गांव वालों को रिहाई से महज एक घंटे पहले ही दी गई थी। कुकी मुखिया ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने तो इन 14 लोगों के जिंदा लौटने की उम्मीद ही छोड़ दी थी, इसलिए फिलहाल पूरे गांव में भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा है।
यह पूरा विवाद 13 मई को शुरू हुआ था, जब कुकी-ज़ो बहुल कांगपोकपी और नागा बहुल सेनापति जिले में दोनों पक्षों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था। इसके चलते दोनों ही गुटों ने दर्जनों ग्रामीणों का अपहरण कर लिया था। हालांकि, उस वक्त एक दिन के लंबे गतिरोध के बाद दोनों तरफ से 14-14 बंधकों को रिहा भी कर दिया गया था।
इस शुरुआती रिहाई के बावजूद, सेनापति जिले के नागा समूहों ने 14 कुकी ग्रामीणों को बंधक बनाए रखा। उनकी स्पष्ट शर्त थी कि कुकी गुटों द्वारा अगवा किए गए उनके छह लोगों को पहले रिहा किया जाए। दूसरी ओर, कुकी समूहों ने किसी भी नागा व्यक्ति को बंधक बनाने से साफ इनकार करते हुए दावा किया था कि उन्होंने 15 मई को ही सभी को सुरक्षित छोड़ दिया था।
स्थानीय लोगों के अनुसार, 13 मई की सुबह ये कुकी ग्रामीण जंगल में लकड़ी बीनने गए थे। उसी दिन कांगपोकपी में एक घात लगाकर किए गए हमले में थाडौ बैपटिस्ट एसोसिएशन के तीन चर्च नेताओं की दर्दनाक हत्या कर दी गई थी। इसी घटना के बाद पहाड़ियों में हालात पूरी तरह बेकाबू हो गए थे।
इस हत्या के जवाब में कुकी गुटों ने कांगपोकपी से एक दर्जन से अधिक नागा ग्रामीणों का अपहरण कर लिया। इसके तुरंत बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए तफौ गांव के दो दर्जन से ज्यादा कुकी निवासियों को भी अगवा कर लिया गया था।
चोंगलोई ने जानकारी दी है कि रिहा हुए सभी 14 युवकों की गहन चिकित्सा जांच की जा रही है। सेना के एक डॉक्टर ने उनका मुआयना किया है और उन्हें नागरिक अस्पतालों के डॉक्टरों को भी दिखाया जाएगा। मुखिया ने राहत जताते हुए कहा कि युवकों के शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं हैं, लेकिन एक महीने तक बंधक रहने के कारण उनकी मानसिक और मनोवैज्ञानिक स्थिति का अंदाजा लगाना अभी मुश्किल है।
यूनाइटेड नागा काउंसिल (यूएनसी) के अध्यक्ष एनजी लोर्हो ने स्पष्ट किया कि यह रिहाई सेनापति के विभिन्न नागा समूहों के बीच आम सहमति बनने के बाद ही संभव हो सकी है। सरकार ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि एक तय समय सीमा के भीतर उनके छह लोगों का पता लगा लिया जाएगा। इसी वादे के बाद उन्होंने पूरी तरह से मानवीय आधार पर यह पहला कदम उठाया है।
तफौ के करीब दिए गए एक मौखिक बयान में यूएनसी अध्यक्ष ने कहा कि वे नागालैंड के मुख्यमंत्री डॉ. नेफियू रियो के माध्यम से माननीय गृह मंत्री अमित शाह जी द्वारा की गई प्रतिबद्धता का सम्मान कर रहे हैं। सरकार छह लापता नागा बंधकों की स्थिति का पता लगाने और उन्हें खोजने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
इन 14 कुकी युवकों को छुड़ाने के लिए नागालैंड के सीएम रियो, मेघालय के सीएम कॉनराड संगमा और विभिन्न चर्च समूहों की तरफ से लगातार अपील की जा रही थी। मणिपुर सरकार के गृह विभाग ने भी यूएनसी से मध्यस्थता का आग्रह किया था। सरकार ने साफ कर दिया था कि लापता लोगों का मामला राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) को सौंप दिया गया है और इलाके में सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है।
इन्हीं अपीलों के मद्देनजर इससे पहले 1 जून को भी बंधकों को रिहा करने की चर्चा हुई थी। लेकिन तब सेनापति में तनाव पैदा हो गया क्योंकि कुछ नागा समूहों ने छह लोगों की बरामदगी के बिना एकतरफा रिहाई का कड़ा विरोध किया था। इसके बाद नागा जनता की भावनाओं का हवाला देते हुए यूएनसी ने रिहाई का फैसला उस वक्त टाल दिया था।
मंगलवार को बंधकों की सुरक्षित वापसी का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री नेफियू रियो ने एक आधिकारिक बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि मानवता का यह कार्य हमें याद दिलाता है कि बातचीत, करुणा और विश्वास ही सुलह तथा शांति के सबसे शक्तिशाली उपकरण हैं। उन्होंने एक बार फिर मानवीय आधार पर 6 नागा बंधकों की सुरक्षित रिहाई की अपील की ताकि वे भी जल्द अपने प्रियजनों से मिल सकें और क्षेत्र में आपसी समझ व सद्भाव का रास्ता साफ हो सके।