नई दिल्ली- नेटफ्लिक्स की नई ब्रिटिश क्राइम ड्रामा सीरीज Adolescence ने दुनिया भर में धूम मचा दी है। इस सीरीज को जैक थॉर्न और स्टीफन ग्राहम ने बनाया और फिलिप बरेंटिनी ने निर्देशित किया है, यह 13 मार्च 2025 को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने के बाद से दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गई है।
चार एपिसोड वाली इस सीरीज को एक-शॉट फॉर्मेट में फिल्माया गया है, जिसकी कहानी, तकनीकी कौशल और शानदार अभिनय के लिए इसे व्यापक प्रशंसा मिली है। लेकिन इसके सिनेमाई गुणों से परे, Adolescence ने पेरेंटिंग, सोशल मीडिया और डिजिटल युग में बच्चों को पालने की चुनौतियों पर एक महत्वपूर्ण बहस छेड़ दी है।
यह शो न सिर्फ अपनी कहानी और तकनीकी कौशल के लिए सराहा जा रहा है, बल्कि यह पेरेंटिंग और सोशल मीडिया के प्रभाव पर गहरा सवाल भी उठाता है। लेकिन आखिर यह सीरीज है क्या, और क्यों हर माता-पिता को इसे देखना चाहिए? आइए जानते हैं।
क्या है "Adolescence" की कहानी?
Adolescence एक 13 साल के स्कूली छात्र जेमी मिलर (ओवेन कूपर) की कहानी है, जिसे उसकी सहपाठी केटी लियोनार्ड की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया जाता है। यह शो एक छोटे से अंग्रेजी शहर में सेट है, जहां पुलिस जांच, स्कूल की खोजबीन और मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन के जरिए जेमी के जीवन की काली दुनिया को उजागर किया जाता है।
जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, पता चलता है कि जेमी सोशल मीडिया पर इंसेल संस्कृति से जुड़े साइबर बुलिंग का शिकार हुआ है। इंसेल (Incel) शब्द "इनवॉलंटरी सेलिबेट" (Involuntary Celibate) का संक्षिप्त रूप है, जो एक ऑनलाइन सबकल्चर से जुड़ा हुआ है। यह उन लोगों के समूह को दर्शाता है, जो खुद को रोमांटिक या यौन साथी पाने में असमर्थ मानते हैं, भले ही वे ऐसा चाहते हों। इंसेल समुदाय के सदस्य अक्सर महिलाओं और लड़कियों को दोष देते हैं, उन्हें वस्तु के रूप में देखते हैं और उनका अपमान करते हैं।
केटी ने इंस्टाग्राम पर जेमी को इंसेल बताकर उसका मजाक उड़ाया था, जिससे जेमी में गुस्सा और नफरत भर गई। यह सीरीज जेमी की परेशान मानसिकता, उसके टूटे परिवार और उन सामाजिक दबावों को दिखाती है, जो अंततः एक त्रासदी का कारण बनते हैं।
हर एपिसोड को एक ही शॉट में फिल्माया गया है, जो कहानी की तीव्रता को और बढ़ा देता है। यह शो मर्दानगी, पेरेंटिंग की जिम्मेदारी और युवा मन पर सोशल मीडिया के प्रभाव जैसे विषयों को उजागर करता है।
क्यों हर माता-पिता को देखना चाहिए यह शो?
Adolescence सिर्फ एक क्राइम ड्रामा नहीं है; यह आधुनिक पेरेंटिंग की चुनौतियों का आईना है। यह शो माता-पिता को यह याद दिलाता है कि आज के डिजिटल युग में बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखना कितना जरूरी है।
फिल्म निर्माता करण जौहर, जो खुद जुड़वां बच्चों के पिता हैं, ने इंस्टाग्राम पर इस शो को "वेक-अप कॉल" बताया। उन्होंने लिखा, "बच्चों को पालना एक आशीर्वाद है, लेकिन यह एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। कोई किताब या पॉडकास्ट आपको इसके लिए तैयार नहीं कर सकता। आपको पहले खुद का सबसे अच्छा संस्करण बनना होगा।"
जौहर ने यह भी कहा कि बच्चे माता-पिता की आत्मा की छवि होते हैं। "आप क्या कहते हैं, कैसे कहते हैं, आपकी आदतें, आपका व्यवहार... यह सब आपके बच्चे पर असर डालता है। वे आपकी नकल करते हैं, चाहे आप इसे महसूस करें या नहीं।"
यह शो भारतीय माता-पिता के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश बन गया है। बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट ने इसे "सचमुच परफेक्शन" बताया और इसकी तकनीकी कुशलता की सराहना की।
फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप ने भी इस शो की प्रशंसा की, लेकिन साथ ही भारतीय फिल्म उद्योग की आलोचना भी की। उन्होंने कहा, "हमारे पास 1.4 अरब लोग हैं, लेकिन कला और दृष्टि की सराहना करने वाले लोगों की कमी है। यहां सिर्फ नंबरों और कमाई पर ध्यान दिया जाता है।"
दो किशोर बच्चों के पेरेन्ट्स संज्ञा और विशाल शर्मा कहते हैं," Adolescence सिर्फ एक सीरीज नहीं है; यह एक सबक है। यह माता-पिता को यह याद दिलाता है कि बच्चों की जिंदगी में ज्यादा जागरूक, ज्यादा मौजूद और ज्यादा शामिल होना कितना जरूरी है। सोशल मीडिया के इस दौर में, जहां बच्चे तुलना और दबाव में जी रहे हैं, यह शो हर माता-पिता के लिए एक जरूरी संदेश लेकर आता है।"
डॉक्टर पल्लवी वर्मा (मनोवैज्ञानिक और पेरेंटिंग एक्सपर्ट) कहती हैं, "Adolescence सीरीज ने मुझे गहराई से प्रभावित किया। यह सिर्फ एक क्राइम ड्रामा नहीं है, बल्कि आधुनिक पेरेंटिंग और सोशल मीडिया के प्रभाव का एक शक्तिशाली आईना है। जेमी का किरदार हमें यह याद दिलाता है कि बच्चों की मानसिकता को समझना कितना जरूरी है। सोशल मीडिया और साइबर बुलिंग के इस दौर में, माता-पिता को अपने बच्चों के साथ खुलकर बातचीत करनी चाहिए।"
कॉलेज व्याख्याता दीप्ति भटनागर कहती हैं, "Adolescence सीरीज ने मुझे शिक्षा और समाज के बीच के अंतर को समझने का मौका दिया। यह शो न केवल बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे स्कूल और शिक्षा प्रणाली इन मुद्दों से निपटने में अक्सर विफल हो जाती है। जेमी और केटी की कहानी हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हमारी शिक्षा प्रणाली में क्या कमी है और इसे कैसे बेहतर बनाया जा सकता है।"