15 मई 2026 की सुबह सुप्रीम कोर्ट में एक ऐसी बात कही गई जो भारत के न्यायिक इतिहास में दर्ज हो गई लेकिन शायद उस तरह नहीं, जैसा मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोचा होगा। फर्जी कानून की डिग्रियों से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान CJI ने कहा: "ऐसे युवा हैं जो कॉकरोच की तरह हैं, जिन्हें कोई रोज़गार नहीं मिलता, वे मीडिया, सोशल मीडिया, RTI एक्टिविस्ट बन जाते हैं और सबको अटैक करते हैं।"
यह वाक्य सोशल मीडिया पर आते ही तूफान की तरह फैल गया। ट्विटर, इंस्टाग्राम और WhatsApp पर लाखों लोगों ने इसे शेयर किया। आक्रोश की एक लहर उठी जिसने न सिर्फ सोशल मीडिया बल्कि राजनीतिक गलियारों को भी हिला दिया। लेकिन इस बार युवाओं ने सिर्फ गुस्सा जाहिर नहीं किया, उन्होंने कुछ अलग किया। उन्होंने एक पार्टी बना ली।
हालाँकि चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बाद में एक स्पष्टीकरण जारी किया। उन्होंने कहा कि मीडिया ने उनकी बात को "गलत तरीके से पेश किया", उनका निशाना फर्जी डिग्री से बार में घुसे लोगों पर था, न कि बेरोज़गार युवाओं पर। उन्होंने कहा, "भारत का हर युवा मुझे प्रेरित करता है… मैं उन्हें विकसित भारत के स्तंभ मानता हूँ।" लेकिन मुख्य न्यायाधीश की सफाई से युवाओं का गुस्सा कम ना हुआ और कोकरोच आर्मी पनपती रही।
अमेरिका के बोस्टन शहर में बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स की पढ़ाई कर रहे अभिजीत दीपके ने CJI की वायरल टिप्पणी पर अपने निजी ट्विटर अकाउंट से एक इम्पल्सिव ट्वीट किया: "What if all the cockroaches come together?" (क्या हो अगर सभी कॉकरोच एक साथ आ जाएँ?)
अभिजीत ने बताया कि उस ट्वीट को 700 से 800 रिपोस्ट मिले जिसमें ज़्यादातर Gen Z यूज़र्स और कॉलेज स्टूडेंट्स थे। "सब कहने लगे, हमें साथ आना चाहिए। मुझे लगा कि यहाँ कुछ क्रिएटिव और मजाकिया करने का मौका है।" अभिजीत ने बताया कि शुरुआत में यह कोई बड़ा आंदोलन बनाने की योजना नहीं थी, यह एक सहज, स्वाभाविक प्रतिक्रिया थी। बाद में युवाओं को इस मुद्दे पर सीरियस होते देखा तो यह एक मूवमेंट ही बन गया।
Launching a new platform for all the “cockroaches” out there. If you wish to join, hit the link below.
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) May 16, 2026
Eligibility criteria:
• Unemployed
• Lazy
• Chronically online
• Ability to rant professionallyhttps://t.co/ENoTQKPo3T pic.twitter.com/lKG5JCmhJm
15 मई की रात से ही काम शुरू हो गया था। अगले दिन यानी 16 मई को 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) अस्तित्व में आई। वेबसाइट cockroachjantaparty.org लॉन्च हुई। टैगलाइन थी: "Voice of the Lazy & Unemployed." पार्टी ने खुद को "सेक्युलर – सोशलिस्ट – डेमोक्रेटिक – लेज़ी " पार्टी के तौर पर परिभाषित किया।
पार्टी का एलान था: "एक ऐसी राजनीतिक पार्टी, जिसे इस व्यवस्था ने गिनना ही भुला दिया। पाँच माँगें। कोई प्रायोजक नहीं। बस एक विशाल, अड़ियल जनसमूह।"
अभिजीत कहते हैं, “मुझे और मेरे दो अन्य दोस्तों को इसे करने में मुश्किल से दो-तीन घंटे लगे, क्योंकि वेबसाइट का डिज़ाइन मेरे करीबी लोगों द्वारा AI की मदद से तैयार किया गया था। हमारा विज़न अभी भी विकसित हो रहा है। वैचारिक रूप से, हम एक धर्मनिरपेक्ष, समाजवादी, लोकतांत्रिक और जाति-विरोधी संगठन हैं। हमारी विचारधारा गांधी, अंबेडकर और नेहरू से प्रेरित है।"
48 घंटे के भीतर x पर 25,000 से अधिक फ़ॉलोअर्स बन गए। इन्स्टाग्राम पर एक ही दिन में 13,000 से ज़्यादा लोग जुड़ गए। कुल सदस्यता का आँकड़ा 50,000 को पार कर गया। RTI एक्टिविस्ट अंजलि भारद्वाज ने घोषणापत्र में नए बिंदु जोड़े।
अभिजीत कहते हैं, " 'कॉकरोच जनता पार्टी' युवाओं के लिए भारतीय राजनीति के भविष्य को आकार देने का एक मंच है। CJP एक राष्ट्रव्यापी पहल शुरू करेगी, जिसके तहत युवा नागरिकों से उन मुद्दों पर सुझाव, विचार और प्रतिक्रियाएँ आमंत्रित की जाएँगी जिन पर पार्टी को ध्यान केंद्रित करना चाहिए और जिस तरह का बदलाव वे देखना चाहते हैं।"
18 मई रात 10 बजे पार्टी ने एक ऑनलाइन बैठक बुलाई जिसे "रोचक सत्संग" का नाम दिया गया- "रोचक" यानी कॉकरोच, और "सत्संग" यानी साधुओं की सभा से मिलता जुलता शब्द। इस ऑनलाइन मीटिंग में युवाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। Gen Z के छात्रों, बेरोज़गार युवाओं, पत्रकारों और एक्टिविस्टों ने इसमें भाग लिया।
अभिजीत ने इस सत्संग में साफ कहा कि वे नेता बनने की महत्वाकांक्षा नहीं रखते। "मैं नेता नहीं बनना चाहता था, मैं अपनी फोटो तक नहीं डालता था लेकिन लोगों ने इसे इतनी गंभीरता से लिया कि मुझे आगे बढ़ना पड़ा। वे चाहते थे कि यह आगे जाए।" उनका कहना है कि भारत का युवा खासकर Gen Z इस वक्त व्यवस्था से इतना निराश है जितना पहले कभी नहीं था। Gen Z ने अपनी राजनीतिक चेतना के बाद से सिर्फ एक ही प्रधानमंत्री देखा है। वे बदलाव नहीं देख पाए। बेरोज़गारी है, महँगाई है, और युवाओं में अपने भविष्य के प्रति अनिश्चितता।
अभिजीत ने यह बात भी साफ़ किया कि उनसे कुछ लोगों ने बातचीत में पूछा कि क्या ये नेपाल के जेन Z आन्दोलन की तर्ज पर शुरू हुआ है लेकिन अभिजीत ने साफ़ किया कि यह मंच और पार्टी केवल लोकतान्त्रिक व्यवस्था से सिस्टम में व्याप्त खामियों का विरोध करेगी, CJP भारत के संविधान में दृढ़ विश्वास रखता है और इसके मूल्यों की रक्षा के लिए सदैव कार्य करेगा।
मीटिंग में इस बात पर भी चर्चा हुई कि किस तरह सत्ता के विरोध में उठने वाली आवाजों को दबाया जाता है- सोनम वांगचुक सरीखे उदाहरण के साथ बताया गया कि सिस्टम की खामियां बताने वालों के पीछे ईडी लग जाती है और विपक्ष एकदम बेबस और लाचार दिखता है।

क्या है CJP का घोषणापत्र
1. यदि CJP सत्ता में आई, तो कोई भी मुख्य न्यायाधीश सेवानिवृत्ति के बाद राज्यसभा सीट नहीं पाएगा। न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए यह कदम अनिवार्य है।
2. यदि किसी भी राज्य में चाहे CJP शासित हो या विपक्ष, कोई वैध वोट डिलीट होता है, तो मुख्य चुनाव आयुक्त को UAPA के तहत गिरफ्तार किया जाएगा। नागरिक का मताधिकार छीनना आतंकवाद से कम नहीं।
3. संसद की सीटें बढ़ाए बिना महिलाओं को 50% आरक्षण दिया जाएगा, 33% नहीं। इसके साथ ही 50% कैबिनेट पद भी महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे।
4. अंबानी और अडाणी के स्वामित्व वाले सभी मीडिया हाउसों के लाइसेंस रद्द किए जाएंगे ताकि सच्चे स्वतंत्र मीडिया के लिए जगह बने। गोदी मीडिया एंकरों के बैंक खातों की जाँच होगी।
5. जो भी MLA या MP दल-बदल करे, उसे 20 वर्षों तक न तो चुनाव लड़ने का अधिकार होगा, न ही किसी सार्वजनिक पद पर रहने का। दल-बदल का अर्थ होगा- राजनीतिक मृत्यु।
पार्टी ने अपने विजन स्टेटमेंट में लिखा: हम यहाँ कोई दूसरा 'PM CARES' बनाने, टैक्स देने वालों की कमाई पर दावोस में छुट्टियाँ मनाने, या भ्रष्टाचार को 'रणनीतिक खर्च' का नया नाम देने के लिए नहीं आए हैं। हम तो यहाँ यह पूछने आए हैं: ज़ोर-ज़ोर से, बार-बार और लिखित रूप में कि वह पैसा आख़िर गया कहाँ?
पार्टी की वेबसाइट पर मिशन को एक वाक्य में कहा गया है: "उन युवाओं के लिए एक पार्टी बनाओ जिन्हें आलसी, क्रॉनिकली ऑनलाइन, और अब कॉकरोच कहा जाता है। बाकी सब व्यंग्य है।"
With the growing support for CJP, we are fully aware that attempts will be made to dismantle us and portray us as anti-social elements.
— Cockroach Janta Party (@CJP_2029) May 17, 2026
We want to make it absolutely clear that CJP firmly believes in the Constitution of India and will always work towards protecting its values. pic.twitter.com/PsWw8LYQaV
कौन बन सकता है कॉकरोच जनता पार्टी का मेंबर?
CJP की वेबसाइट पर सदस्यता की शर्तें भी व्यंग्यात्मक अंदाज़ में लिखी गई हैं लेकिन इनके पीछे एक गहरा सामाजिक संदेश छिपा है:
बेरोज़गार: ज़बरदस्ती से, मर्ज़ी से, या सिद्धांत से। हम नहीं पूछते।
आलसी: शारीरिक रूप से केवल। दिमाग चलता रहे, विचार बुनते रहो।
क्रॉनिकली ऑनलाइन: न्यूनतम 11 घंटे प्रतिदिन, बाथरूम ब्रेक सहित।
प्रोफेशनल रैंटर: जब तक बात सच्ची, तीखी और किसी मायने की हो।
अभिजीत दीपके ने ऑनलाइन मीटिंग में बताया कि सदस्यों की बेहद मांग पर सभी को वर्मेचुअल मेम्बरशिप कार्ड भी जारी किया जायेगा।
दो दिनों में सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी इतनी वायरल हो चुकी है कि TMC सांसद महुआ मोइत्रा और पूर्व क्रिकेटर और सांसद कीर्ति आज़ाद ने भी पार्टी में दिलचस्पी जाहिर की।
दोनों नेताओं के इस समर्थन ने CJP को एक साधारण सोशल मीडिया कटाक्ष से परे एक राजनीतिक संवाद के मंच के रूप में स्थापित कर दिया।
CJP ने एक राष्ट्रव्यापी पहल की भी घोषणा की है: एक वर्चुअल Gen Z राष्ट्रीय सम्मेलन जिसमें युवा नागरिकों से सुझाव, विचार और प्रतिक्रियाएँ माँगी जाएंगी। पार्टी का मानना है कि यह "भारतीय राजनीति के भविष्य को आकार देने का मंच" है।
इस पूरे प्रकरण को सिर्फ एक वायरल ट्रेंड मानना भूल होगी। अभिजीत दीपके की बात में एक बड़ी सच्चाई है - भारत का Gen Z आज एक ऐसी पीढ़ी है जिसने राजनीतिक होश संभालने के बाद सिर्फ एक प्रधानमंत्री देखा है। इस पीढ़ी ने कोरोना महामारी के दौरान शिक्षा खोई, रोज़गार के अवसर सिकुड़ते देखे, सरकारी परीक्षाओं में पेपर लीक की मार झेली। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की मौखिक टिप्पणी के जवाब में एक व्यंग्यपूर्ण प्रतिक्रिया के तौर पर शुरू हुई यह पहल, अब एक ऐसे ऑनलाइन आंदोलन का रूप ले चुकी है जो युवाओं के गुस्से, राजनीतिक व्यंग्य और संस्थाओं के प्रति अविश्वास को दर्शाता है।
यह आंदोलन हास्य, व्यंग्य और डिजिटल सक्रियता के ज़रिए बेरोज़गार और निराश युवाओं की आवाज़ बनने का प्रयास दिखाई देता है।