इंफाल: मणिपुर की राजधानी इंफाल सोमवार को एक विशाल विरोध प्रदर्शन का गवाह बनी। यहां हजारों की संख्या में लोगों ने सड़कों पर उतरकर राज्य में आगामी जनगणना प्रक्रिया शुरू होने से पहले साल 1951 के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को अपडेट करने की पुरजोर मांग की। इस महारैली में आम जनता के साथ-साथ 14 प्रमुख नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए, जो एनआरसी को अद्यतन किए बिना जनगणना कराने के कदम से बेहद नाराज दिखे।
इस विरोध प्रदर्शन के बाद आयोजित 'पीपुल्स कन्वेंशन' में नागरिक संगठनों ने एक सुर में केंद्र और राज्य सरकार पर दबाव बनाने का प्रस्ताव पास किया। नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने तय किया है कि वे मणिपुर के मुख्यमंत्री से मुलाकात कर इस संवेदनशील मुद्दे पर केंद्र सरकार के साथ एक सार्थक और ठोस बातचीत शुरू करने का आग्रह करेंगे।
इसके अलावा, इस सम्मेलन में यह मांग भी उठाई गई कि जनसांख्यिकीय परिवर्तन पर केंद्र सरकार द्वारा गठित 'उच्च स्तरीय समिति' में मणिपुर सरकार के किसी प्रतिनिधि या आधिकारिक एजेंसी को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। यह मांग राज्य में तेजी से बदल रहे जनसांख्यिकीय संतुलन को लेकर स्थानीय समाज में बढ़ती गंभीर चिंताओं के मद्देनजर की गई है।
रैली के दौरान यूनाइटेड कमेटी मणिपुर के अध्यक्ष शांता नाहकपाम ने एनआरसी के मुद्दे पर केंद्र सरकार की कथित निष्क्रियता की तीखी आलोचना की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मणिपुर के मूल निवासियों की पहचान, उनके भूमि अधिकारों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की रक्षा के लिए राज्य में एनआरसी को अपडेट करना बेहद जरूरी हो चुका है।
शांता नाहकपाम ने यह अंदेशा भी जताया कि बिना सत्यापन वाले जनसांख्यिकीय आंकड़ों के आधार पर भविष्य में होने वाला परिसीमन (Delimitation) चुनाव में प्रतिनिधित्व को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकता है। इससे मूल निवासी समुदायों के संवैधानिक सुरक्षा कवच को भारी नुकसान पहुंचने का खतरा है।
कमेटी के अध्यक्ष ने प्रशासनिक टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब 2023 की जातीय हिंसा के कारण विस्थापित हुए हजारों लोग आज भी राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं, तो ऐसे कठिन माहौल में एक निष्पक्ष और विश्वसनीय जनगणना कैसे संभव हो सकती है? उन्होंने जानकारी दी कि नागरिक संगठन पहले ही केंद्र सरकार को पत्र सौंपकर मणिपुर में जनगणना अभ्यास को स्थगित करने की गुहार लगा चुके हैं।
दूसरी तरफ, कुकी समुदाय के शीर्ष संगठन 'कुकी इनपी मणिपुर' ने भी राज्य में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) कार्यक्रम का कड़ा विरोध किया है। संगठन का कहना है कि सरकार को इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से पहले उन व्यावहारिक परिस्थितियों को ठीक करना चाहिए था, जिनसे विस्थापित लोग जूझ रहे हैं।
संगठन के मुताबिक, लगभग 59,000 कुकी-जो आंतरिक रूप से विस्थापित लोग अपने घरों को लौटने में असमर्थ हैं और इस वजह से वे इस विशेष संशोधन प्रक्रिया में भाग नहीं ले पा रहे हैं। ऐसी स्थिति में इतनी बड़ी और प्रभावित आबादी को शामिल किए बिना इस अभियान को आगे बढ़ाना लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के सिद्धांतों के पूरी तरह खिलाफ है।
'कुकी इनपी मणिपुर' ने अपने आधिकारिक बयान में साफ किया कि समाज के एक बड़े और सबसे संवेदनशील हिस्से की भागीदारी सुनिश्चित किए बिना किया जा रहा यह प्रशासनिक कार्य अधूरा है। यही वजह है कि वर्तमान स्वरूप में इस चुनावी और प्रशासनिक प्रक्रिया को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।