मणिपुर में कुकी और नागा समुदायों के बीच बंधक मामला: 5 दिन बाद भी तनाव बरक़रार, 6 लोग अब भी लापता

01:31 PM May 18, 2026 | Rajan Chaudhary

मणिपुर के पहाड़ी इलाकों में चल रहा बंधक संकट पांचवें दिन भी थमता नजर नहीं आ रहा है। कांगपोकपी जिले में नागा समूहों द्वारा दावा किए गए छह लापता लोगों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। दूसरी ओर, कुकी पक्ष का कहना है कि उन्होंने अपने कब्जे में मौजूद सभी बंधकों को छोड़ दिया है। इस असमंजस के कारण राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है।

कुकी और नागा समुदायों के बीच बढ़े इस तनाव की शुरुआत बुधवार को हुई थी। कुकी-बहुल कांगपोकपी और नागा-बहुल सेनापति जिलों में दोनों पक्षों के दर्जनों ग्रामीणों को अगवा कर लिया गया था। करीब एक दिन तक चले कड़े गतिरोध के बाद, शुक्रवार सुबह दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के 14-14 बंधकों को रिहा कर दिया था। इसके बावजूद हालात स्थिर नहीं हुए हैं, क्योंकि सेनापति जिले में नागा समूहों ने अभी भी 14 कुकी लोगों को अपने कब्जे में रखा हुआ है। नागा पक्ष का आरोप है कि उनके छह लोग कुकी समूहों के पास हैं और वे उनकी सुरक्षित वापसी की मांग कर रहे हैं।

कुकी इनपी मणिपुर के सूचना सचिव जंघाओलुम हाओकिप ने इस मामले पर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि उनके संगठन ने शुक्रवार सुबह अपनी हिरासत में लिए गए सभी 14 लोगों को रिहा कर दिया था। नागा समूहों द्वारा छह और लोगों के लापता होने की बात पर उन्होंने कहा कि उनके पास इन लोगों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। वे लगातार अपने क्षेत्र के स्वयंसेवकों और विभिन्न समूहों के संपर्क में हैं, लेकिन किसी के भी बंधक होने की पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने मांग की है कि सुरक्षा बल और सरकार दोनों तरफ सघन बचाव अभियान चलाकर स्थिति को नियंत्रित करें।

राज्य के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने पुष्टि की है कि सुरक्षा बल और पुलिस लापता छह लोगों की तलाश में कांगपोकपी और उसके आसपास के इलाकों में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। अधिकारी के अनुसार, नागा समूहों ने 14 लोगों को बंधक बना रखा है, जबकि उनका दावा है कि छह नागा नागरिक कुकी समूहों के पास हैं। हालांकि, कुकी पक्ष इस बात से साफ इनकार कर रहा है, जिसके कारण उन लापता लोगों को ढूंढने के लिए तलाशी अभियान तेज कर दिया गया है।

यूनाइटेड नागा काउंसिल के अध्यक्ष एनजी लोर्हो ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह बेहद संवेदनशील मामला है कि इतने दिन बीत जाने के बाद भी उन छह लोगों की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। हालांकि शुक्रवार को दोनों पक्षों से 14-14 लोगों की अदला-बदली हो गई थी, लेकिन जब तक उनके छह लोगों का पता नहीं चल जाता, तब तक उनके लोग भी दूसरे पक्ष के नागरिकों को नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि वे मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं और लापता लोगों की स्थिति साफ होते ही अगला कदम उठाया जाएगा।

इस पूरे विवाद की जड़ें बुधवार सुबह हुई एक हिंसक घटना से जुड़ी हैं। चंदेल या चूराचाँदपुर से कांगपोकपी की ओर जा रहे थाडौ बैपटिस्ट एसोसिएशन के तीन प्रमुख चर्च नेताओं, रेवरेंड वुमथांग सितल्हौ, रेवरेंड कैगोउलेन ल्हौवम और पादरी पाओगोउलेन सितल्हौ की गाड़ियों पर हमला कर उनकी हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद से ही मणिपुर में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया।

चर्च नेताओं पर हुए इस हमले के तुरंत बाद कुकी समूहों ने इसका आरोप सशस्त्र नागा संगठनों पर लगाना शुरू कर दिया। इसके प्रतिशोध में कांगपोकपी जिले के लियांगमाई नागा गांव 'कोनसाखुल' के कुछ निवासियों को कुकी समूहों ने बंधक बना लिया। जवाब में नागा समूहों ने भी सेनापति जिले से कम से कम 23 लोगों और कांगपोकपी के कुछ अन्य हिस्सों से लोगों को अपनी हिरासत में ले लिया।

नागा समूहों के मुताबिक, लापता चल रहे सभी छह लोग पुरुष हैं और उनमें से पांच कोनसाखुल गांव के रहने वाले हैं। इनमें से एक की पहचान पड़ोसी गांव हरुप के पादरी रेवरेंड मनु थियूमाई के रूप में की गई है।

यूनाइटेड नागा काउंसिल के एक अन्य नेता थोट्सो ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जिस जगह से इन लोगों का अपहरण किया गया, वह लीमाखोंग सैन्य स्टेशन के बेहद करीब है, जो राज्य की सबसे बड़ी सैन्य छावनी है। ऐसे संवेदनशील इलाके से लोगों का गायब होना और अब तक उनका सुराग न मिलना बेहद चिंताजनक है।

दूसरी तरफ, कुकी समूहों ने नागा संगठनों की हिरासत में मौजूद 14 कुकी नागरिकों की पहचान स्पष्ट की है। ये सभी पुरुष हैं, जिनमें से 13 सेनापति जिले के सीमावर्ती गांव तापहौ कुकी के निवासी हैं और एक व्यक्ति पास के ही हेंगबुंग गांव का रहने वाला है।

कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी के नेता थांगतिनलेन हाओकिप ने बताया कि बंधक बनाए गए लोगों में तीन छात्र भी शामिल हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि हिरासत में लिए गए इन निर्दोष लोगों का मौजूदा संघर्ष से कोई लेना-देना नहीं है और वे हमेशा से अपने नागा पड़ोसियों के साथ शांति से रहते आए हैं।

इस बीच, रविवार शाम को कुकी छात्र संगठन (सदर हिल्स) ने एक अल्टीमेटम जारी कर दिया है। उन्होंने नागा समूहों के कब्जे में मौजूद 14 कुकी नागरिकों को 48 घंटे के भीतर रिहा करने की मांग की है। छात्र संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय में रिहाई नहीं हुई, तो वे बड़े पैमाने पर उग्र आंदोलन शुरू करेंगे।

मणिपुर में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच पिछले तीन वर्षों से जातीय संघर्ष जारी है। लेकिन इस बीच कुकी-जो और नागा समुदायों के बीच इस साल फरवरी में उखरुल जिले से शुरू हुआ नया तनाव अब लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसने राज्य की कानून व्यवस्था के सामने एक नई और गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है।