नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन के 'पर्सन ऑफ इंडियन ओरिजिन' (पीआईओ) कार्ड को 'ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया' (ओसीआई) कार्ड में बदलने के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना कारण बताए किसी भी आवेदन को खारिज नहीं किया जा सकता।
अदालत ने कहा कि वरदराजन का 2022 का मूल आवेदन अब बहाल हो गया है। संबंधित अधिकारियों को इस पर फिर से विचार करना होगा और इसके संबंध में एक उचित व स्पष्ट आदेश पारित करना होगा।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस पुरुषेंद्र कौरव ने गृह मंत्रालय के अधिकारियों से कड़े सवाल किए। उन्होंने कहा कि किसी भी आदेश में कारण स्पष्ट होना उसकी 'आत्मा' होता है। अदालत ने पूछा कि क्या बिना उचित कारण बताए पारित किया गया कोई भी आदेश कानूनी रूप से मान्य हो सकता है।
जस्टिस कौरव ने टिप्पणी की कि इस फैसले को बरकरार नहीं रखा जा सकता। अधिकारियों को एक 'स्पीकिंग ऑर्डर' यानी कारण सहित आदेश पारित करके याचिकाकर्ता के अधिकारों पर पुनर्विचार करना होगा। इन टिप्पणियों के साथ अदालत ने गृह मंत्रालय के 2 अप्रैल के संचार को पूरी तरह से रद्द कर दिया।
अदालत का मानना था कि यदि फैसले में कारण ही नहीं बताए जाएंगे, तो याचिकाकर्ता भविष्य में उसे चुनौती कैसे देगा। इसके अलावा, कोई भी अपीलीय अदालत बिना उचित आधार के मामले की सच्चाई और तथ्यों का सही आकलन नहीं कर सकती है।
डिजिटल समाचार प्लेटफॉर्म 'द वायर' के संस्थापक संपादकों में से एक, सिद्धार्थ वरदराजन ने अपने पीआईओ कार्ड को ओसीआई कार्ड में बदलने के लिए साल 2022 में आवेदन किया था। चार साल से अधिक समय तक इस आवेदन को लंबित रखने के बाद, 2 अप्रैल को एक लाइन के ईमेल के जरिए इसे खारिज कर दिया गया था। इस ईमेल में आवेदन ठुकराने का कोई आधार नहीं बताया गया था।
अमेरिकी नागरिक सिद्धार्थ वरदराजन की जड़ें भारत से गहराई से जुड़ी हैं और वे 1995 से लगातार देश में रह रहे हैं। उन्हें पहली बार अक्टूबर 2002 में भारत सरकार द्वारा पीआईओ कार्ड जारी किया गया था।
नागरिकता अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के तहत 2015 में एक अधिसूचना जारी की गई थी। इस नियम के अनुसार सभी मौजूदा पीआईओ कार्डधारकों को कानूनी रूप से ओसीआई कार्डधारक मान लिया गया था। जब उनका पुराना पीआईओ कार्ड मशीन-रीडेबल नहीं रहा, तब वरदराजन ने जनवरी 2022 में नई दिल्ली स्थित एफआरआरओ (विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय) में ओसीआई दस्तावेजों में इसे बदलने के लिए आवेदन किया था।
गृह मंत्रालय ने अपने अस्वीकृति ईमेल में उन्हें आगे भारत में रुकने और यात्रा के लिए उचित वीजा सेवाएं लेने की सलाह दी थी। अधिकारियों का कहना था कि 1 जनवरी 2026 से पीआईओ कार्ड किसी भी तरह की यात्रा और प्रवास के लिए वैध नहीं रहेगा।
हाईकोर्ट के नए फैसले के बाद अब 2022 का वह मूल आवेदन फिर से प्रभावी हो गया है और अधिकारियों को इस पर नए सिरे से फैसला लेने का निर्देश दिया गया है।
इस कानूनी प्रक्रिया के बीच, वरदराजन ने 15 से 17 मई तक एस्टोनिया में आयोजित होने वाले एक सम्मेलन में शामिल होने के लिए यात्रा की अनुमति मांगी है। अदालत ने उनके इस विशिष्ट आवेदन को फिलहाल लंबित रखा है और अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए बुधवार को मामले की अगली सुनवाई तय की है।