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मलयालम फिल्म 'एम्पुरान' में गोधरा कांड से मिलते-जुलते सीन्स पर उबाल — अभिनेता मोहनलाल ने क्यों किया विवादित हिस्से हटाने का ऐलान?

तिरुवनंतपुरम-  मलयालम सिनेमा के सुपरस्टार मोहनलाल की नई फिल्म 'एम्पुरान' (L2: Empuraan) जारी होते ही राजनीतिक विवादों में घिर गई है। फिल्म में गुजरात दंगों (2002) से मिलते जुलते सीन्स को दर्शाया गया है और एक किरदार का नाम बाबा बजरंगी रखा गया है, जिसे संघ परिवार के समर्थकों ने आपत्तिजनक बताया है। इसके बाद मोहनलाल ने सार्वजनिक माफी मांगते हुए कहा कि फिल्म से विवादित दृश्य हटाए जाएंगे।

'एम्पुरान'  पृथ्वीराज सुकुमारन द्वारा निर्देशित और मोहनलाल अभिनीत फिल्म 'लूसिफर' (2019) का सीक्वल है। फिल्म की शुरुआत गुजरात दंगों की तरह एक दृश्य से होती है, जिसमें एक खलनायक का नाम बाबा बजरंगी रखा गया है। यह नाम 2002 के दंगों में शामिल एक वास्तविक व्यक्ति के नाम से मिलता-जुलता है, जिसे लेकर आरएसएस और भाजपा समर्थक नाराज हैं।

इसके अलावा, फिल्म में केंद्रीय एजेंसियों जैसे NIA, IB और ED को कथित रूप से नकारात्मक रूप में दिखाया गया है, जिस पर भी विवाद हुआ है।

इसको लेकर है विवाद

फिल्म में कुछ विजुअल्स दिखाए गए हैं, जिन्हें 2002 के गुजरात दंगों और नरसंहार के रेफरेंस से जोड़कर देखा जा रहा है। जबकि मेकर्स का कहना है कि फिल्म पूरी तरह से काल्पनिक है। फिल्म की शुरुआत सांप्रदायिक हिंसा के सीन्स से होती है, जो स्क्रीन पर 15 मिनट से अधिक समय तक चलते है, जबकि टाइटल सीक्वेंस में दिखाए गई तस्वीरें गोधरा कांड से मिलती-जुलती लगती हैं, जिसमें भगवा कपड़े पहने लोगों को ले जा रही साबरमती एक्सप्रेस के एक कोच को जला दिया गया था। वहीं भीड़ द्वारा की गई हिंसा भी दिखाई गई है, जिसमें कई मुसलमान मारे जाते हैं।

कुछ सीक्वेंस बिल्किस बानो केस से भी मिलते-जुलते हैं, जिसमें 11 लोगों को एक परिवार के कई सदस्यों के सामूहिक बलात्कार और हत्या के लिए दोषी ठहराया गया था। भीड़ का नेतृत्व करने वाले बाबा बजरंगी का किरदार, बजरंग दल के नेता बाबू बजरंगी से मिलता-जुलता प्रतीत होता है, जिन्हें नरोदा पाटिया हत्याकांड की साजिश रचने के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

केरल भाजपा के अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने फिल्म को बहिष्कार करने की घोषणा की। उन्होंने कहा, "मैंने 'लूसिफर' देखी थी और पसंद भी की थी, लेकिन 'एम्पुरान' देखने नहीं जाऊंगा क्योंकि इसमें तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।"

आरएसएस के वरिष्ठ नेताओं जे. नंदकुमार और ए. जयकुमार ने भी फिल्म की आलोचना की। संघ से जुड़े संगठनों ने सोशल मीडिया पर अभियान चलाकर फिल्म को "हिंदू-विरोधी" बताया।

वहीं, कांग्रेस और वाम दलों ने फिल्म का समर्थन किया। केरल यूथ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल मामकुट्टाथिल ने कहा, "जो लोग 'कश्मीर फाइल्स' और 'केरल स्टोरी' जैसी फिल्मों की आजादी की वकालत करते थे, वे अब 'एम्पुरान' के खिलाफ हैं।"

केरल कांग्रेस ने ट्वीट कर कहा, "संघ परिवार की सच्चाई दिखाने वाली इस फिल्म से वे इतना डर गए हैं कि अब वे 17 सीन काटने और संवाद बदलने की मांग कर रहे हैं।"

विवाद बढ़ने के बाद मोहनलाल ने एक बयान जारी कर माफी मांगी है। उन्होंने कहा, "मैंने सुना है कि 'एम्पुरान' के कुछ राजनीतिक और सामाजिक संदर्भों ने मेरे प्रशंसकों को नाराज किया है। एक कलाकार के रूप में, मेरी जिम्मेदारी है कि मेरी कोई फिल्म किसी विचारधारा या धर्म के खिलाफ नफरत न फैलाए। इसलिए, हमने फिल्म से ऐसे दृश्य हटाने का फैसला किया है।"

सूत्रों के मुताबिक, फिल्म को फिर से सेंसर बोर्ड के पास भेजा गया है और 17 दृश्य काटे जाएंगे। खलनायक का नाम बदला जाएगा और केंद्रीय एजेंसियों को लेकर आपत्तिजनक दृश्य हटाए जाएंगे।

विवाद के बावजूद फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया है। पहले दिन भारत में ₹24.50 करोड़ और विश्वभर में ₹67 करोड़ का कलेक्शन किया। दो दिनों में ही फिल्म ने ₹100 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया, जो मलयालम सिनेमा के लिए एक रिकॉर्ड है।

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