राहुल गांधी की पीएम मोदी से अपील: 2018 के SC/ST आंदोलन में युवाओं पर दर्ज मामले वापस ले सरकार

03:49 PM Apr 03, 2026 | Rajan Chaudhary

नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर एक अहम मांग उठाई है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि 2 अप्रैल 2018 को हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के दौरान दलित और आदिवासी युवाओं पर दर्ज आपराधिक मुकदमों की समीक्षा की जाए और उन्हें तुरंत वापस लिया जाए।

यह भारी विरोध प्रदर्शन अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों को कमजोर करने वाले एक न्यायिक फैसले के खिलाफ हुआ था। राहुल गांधी ने 1 अप्रैल को लिखे गए इस पत्र की प्रति को अपने सोशल मीडिया हैंडल पर भी देश की जनता के साथ साझा किया है।

अपने पत्र में विपक्षी नेता ने इस बात पर खास जोर दिया कि यह मूल कानून लाखों दलितों और आदिवासियों को व्यवस्थागत भेदभाव और हिंसा के खिलाफ न्याय मांगने का अधिकार देता है। उन्होंने उन दुखद पलों को भी याद किया जब 2018 के इन विरोध प्रदर्शनों के दौरान 14 दलित युवाओं की जान चली गई थी।

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गांधी ने बताया कि उस समय कई अन्य प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया था जो आज भी आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने गहरी चिंता जताते हुए कहा कि इनमें से ज्यादातर युवा अपने परिवार में शिक्षा हासिल करने वाली पहली पीढ़ी हैं। इन लंबित कानूनी मुकदमों के कारण उनकी पढ़ाई, रोजगार के अवसरों और भविष्य पर बेहद नकारात्मक असर पड़ा है।

सरकार का ध्यान मौजूदा कानूनी स्थिति की ओर खींचते हुए कांग्रेस नेता ने याद दिलाया कि संसद ने बाद में एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) संशोधन अधिनियम, 2018 पारित किया था। इस विधायी कदम ने कानून की ताकत को फिर से बहाल किया और उस वाजिब कारण की पुष्टि की जिसके लिए उन युवाओं ने सड़कों पर उतरकर आंदोलन किया था।

उन्होंने आगे कहा कि साल 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस अहम संशोधन को अपनी मंजूरी देते हुए इसे बरकरार रखा था। इन्हीं सभी महत्वपूर्ण तथ्यों के आधार पर राहुल गांधी ने भारत सरकार से इस संवेदनशील मामले में सहानुभूतिपूर्ण और न्यायसंगत रुख अपनाने का जोरदार आग्रह किया है।

उन्होंने एससी/एसटी युवाओं पर दर्ज सभी मुकदमों को रद्द करने की वकालत करते हुए कहा कि ऐसा कदम न्याय के हित में होगा। उनका मानना है कि इन युवाओं को राहत देने से संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और समानता के प्रति देश की प्रतिबद्धता और ज्यादा मजबूत होगी।

अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री से व्यक्तिगत रूप से इस पूरे मामले को पूरी संवेदनशीलता और तत्काल प्रभाव से सुलझाने की अपील की है।