नई दिल्ली। मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'नीट 2026' (NEET 2026) के अचानक रद्द होने के बाद देश में छात्रों का आक्रोश और राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और केंद्र सरकार पर बेहद कड़ा प्रहार किया है। मंगलवार दोपहर 2:27 बजे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए राहुल गांधी ने इस रद्दीकरण को 22 लाख से अधिक छात्रों की मेहनत और उनके सपनों की हत्या करार दिया है।
छात्रों और अभिभावकों के संघर्ष का किया जिक्र
अपने पोस्ट में आक्रामक लेकिन मार्मिक लहजे का इस्तेमाल करते हुए राहुल गांधी ने उन मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों के संघर्ष को रेखांकित किया, जिनके बच्चे इस कठिन परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने लिखा:
"किसी पिता ने कर्ज़ लिया, किसी माँ ने गहने बेचे, लाखों बच्चों ने रात-रात भर जागकर पढ़ाई की, और बदले में मिला— पेपर लीक, सरकारी लापरवाही और शिक्षा में संगठित भ्रष्टाचार।"
उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि इस "भ्रष्ट भाजपाई व्यवस्था" ने छात्रों और उनके माता-पिता के त्याग और उम्मीदों को बेरहमी से कुचल दिया है।
NEET 2026 की परीक्षा रद्द हो गयी।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) May 12, 2026
22 लाख से ज़्यादा छात्रों की मेहनत, त्याग और सपनों को इस भ्रष्ट भाजपाई व्यवस्था ने कुचल दिया।
किसी पिता ने कर्ज़ लिया,
किसी माँ ने गहने बेचे,
लाखों बच्चों ने रात-रात भर जागकर पढ़ाई की,
और बदले में मिला, पेपर लीक, सरकारी लापरवाही और शिक्षा में…
'पेपर माफिया बच निकलते हैं, ईमानदार छात्र भुगतते हैं सज़ा'
राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था में पनप रहे भ्रष्टाचार को रेखांकित करते हुए इसे महज एक प्रशासनिक नाकामी नहीं, बल्कि 'युवाओं के भविष्य के साथ अपराध' बताया है। उन्होंने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि सिस्टम की खामियों के कारण हर बार असली गुनहगार यानी 'पेपर माफिया' आसानी से बच निकलते हैं, जबकि इसका सीधा खामियाजा उन ईमानदार छात्रों को उठाना पड़ता है जिन्होंने दिन-रात मेहनत की है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि परीक्षा रद्द होने के बाद अब लाखों छात्रों को एक बार फिर से वही भीषण मानसिक तनाव, आर्थिक बोझ और भविष्य की अनिश्चितता झेलनी पड़ेगी। उन्होंने सिस्टम की निष्पक्षता पर सवालिया निशान लगाते हुए पूछा, "अगर अपनी तकदीर परिश्रम से नहीं, पैसे और पहुँच से तय होगी, तो फिर शिक्षा का मतलब क्या रह जाएगा?"
प्रधानमंत्री के 'अमृतकाल' पर सीधा प्रहार
अपने बयान के अंत में राहुल गांधी ने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री को निशाने पर लिया। उन्होंने केंद्र सरकार के बहुचर्चित 'अमृतकाल' के नारे पर तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार की नीतियों ने इसे युवाओं के लिए जहर में बदल दिया है। उन्होंने लिखा, "प्रधानमंत्री का तथाकथित अमृतकाल, देश के लिए विषकाल बन गया है।"
सियासी बवाल के आसार
नीट जैसी अति-महत्वपूर्ण परीक्षा के रद्द होने से देश भर के छात्रों में भारी निराशा और गुस्सा है। राहुल गांधी के इस बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि विपक्ष इस मुद्दे को आसानी से छोड़ने वाला नहीं है। आने वाले दिनों में सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक, 'शिक्षा में भ्रष्टाचार' और 'पेपर लीक' के मुद्दे पर सरकार को भारी विरोध का सामना करना पड़ सकता है।