भोपाल। प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है, जब मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्य सचिव को भेजे आधिकारिक पत्र में आरोप लगाया है कि हाल ही में प्रदेश के कई शहरों में सत्तारूढ़ दल से जुड़े पदाधिकारी और कार्यकर्ता कथित रूप से कांग्रेस कार्यालयों पर हमला करने, तोड़फोड़ करने और डराने-धमकाने की घटनाओं में शामिल रहे, जबकि पुलिस प्रशासन इन घटनाओं को रोकने विफल रही। पत्र में इन घटनाओं को लोकतांत्रिक व्यवस्था और राजनीतिक सहअस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बताया गया है और कहा गया है कि ऐसी घटनाएँ प्रदेश के लोकतांत्रिक इतिहास में दुर्भाग्यपूर्ण अध्याय जोड़ रही हैं।
कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों में कहा गया है कि भारतीय जनता पार्टी से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं ने भोपाल, इंदौर सहित अन्य स्थानों पर कांग्रेस कार्यालयों के बाहर एकत्र होकर पथराव, नारेबाजी और तोड़फोड़ की घटनाओं को अंजाम दिया। पत्र में यह भी दावा किया गया है कि कुछ स्थानों पर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमला करने का प्रयास किया गया। कांग्रेस का कहना है कि इन घटनाओं से राजनीतिक माहौल तनावपूर्ण हुआ है और आम कार्यकर्ताओं में असुरक्षा की भावना पैदा हुई है।
पत्र में पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने लिखा है कि घटनाओं के दौरान पुलिस ने अपेक्षित तत्परता और निष्पक्षता नहीं दिखाई और कई मामलों में कार्रवाई करने से बचती रही। आरोप लगाया गया है कि सत्ता के दबाव में प्रशासन उपद्रवियों के खिलाफ प्रभावी कदम नहीं उठा रहा, बल्कि उल्टे कुछ स्थानों पर कांग्रेस नेताओं के खिलाफ ही कथित रूप से निराधार और प्रताड़नात्मक प्रकरण दर्ज किए जा रहे हैं। कांग्रेस ने इसे न्याय और प्रशासनिक निष्पक्षता के सिद्धांतों के विरुद्ध बताया है।
कांग्रेस ने अपने पत्र में मांग की है कि इन सभी घटनाओं की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराई जाए तथा दोषियों पर कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, चाहे वे किसी भी दल या पद से जुड़े हों। साथ ही यह भी आग्रह किया गया है कि यदि किसी स्तर पर राजनीतिक संरक्षण या मिलीभगत सामने आती है तो उसकी भी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए, ताकि प्रदेश की जनता का कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक निष्पक्षता पर विश्वास बना रहे। कांग्रेस का कहना है कि लोकतांत्रिक प्रणाली में विपक्ष की सुरक्षा और राजनीतिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करना शासन की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
BJP कार्यकर्ता दफ्तर में तोड़फोड़ करना चाहते थे- प्रदीप अहिरवार
कांग्रेस नेता प्रदीप अहिरवार ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के कार्यकर्ता पूर्व नियोजित तरीके से हिंसा और तोड़फोड़ के इरादे से कांग्रेस कार्यालय में घुसने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने द मूकनायक से बातचीत में कहा कि उस समय कांग्रेस कार्यकर्ता वहां मौजूद थे और जब भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने जबरन प्रवेश का प्रयास किया तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई। अहिरवार के मुताबिक कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केवल अपना बचाव किया, लेकिन इसी दौरान पत्थरबाजी हुई जिसमें उनका एक साथी घायल हो गया। उनका कहना है कि घटना एकतरफा उकसावे का परिणाम थी और अगर समय रहते प्रशासन हस्तक्षेप करता तो टकराव टाला जा सकता था।
अहिरवार ने आगे आरोप लगाया कि इस झड़प में वे स्वयं सहित तीन दलित नेताओं को निशाना बनाकर हमला किया गया। उन्होंने पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पूरी घटना पुलिस की मिलीभगत से हुई और आरोपियों को संरक्षण मिला। उनके अनुसार पुलिस की मौजूदगी के बावजूद भाजयुमो कार्यकर्ता आक्रामक ढंग से पहुंचे और हमला कर दिया, जिससे कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने रविवार को भोपाल में प्रेस वार्ता के दौरान केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि इंदौर और भोपाल में भाजपा युवा मोर्चा से जुड़े कार्यकर्ता कांग्रेस दफ्तरों पर पत्थरबाजी करते दिखाई दिए, जबकि पुलिस मूकदर्शक बनी रही। श्रीनेत ने कहा कि इंदौर में दूषित पानी से 32 लोगों की मौत जैसे गंभीर मुद्दे पर भाजपा नेताओं की चुप्पी रही, लेकिन राजनीतिक विरोध के नाम पर आज गुंडागर्दी की जा रही है।
प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड तोड़कर कांग्रेस कार्यालयों तक पहुंचकर हमला किया और पूरी घटना कैमरों में रिकॉर्ड होने के बावजूद नामजद एफआईआर दर्ज नहीं की जा रही है। उन्होंने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब फुटेज में साफ दिख रहा है कि पत्थर कौन चला रहा था, तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही, और क्या कानून का लागू होना अब राजनीतिक पहचान पर निर्भर करेगा।
दोनों पक्षों पर मामला दर्ज
पुलिस ने भाजपा और कांग्रेस दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर क्रॉस केस दर्ज करते हुए कार्रवाई की है। हबीबगंज थाने ने कांग्रेस नेता प्रदीप अहिरवार, गोपिल कोतवाल, अभिनव बारोलिया, मुजाहिद सिद्दीकी, अमित शर्मा, अमित खत्री, अजय सोलंकी समेत करीब 50-60 लोगों के खिलाफ मारपीट सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है, वहीं भाजपा की ओर से प्रमोद राजपूत, स्वप्निल बानखेड़े, दिव्यऋषी तिवारी, गौतम चौहान, हनी विश्वकर्मा सहित लगभग 50-60 अन्य कार्यकर्ताओं पर भी प्रकरण कायम किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच में लिया है और अन्य लोगों की पहचान की जा रही है।
क्या था विवाद?
पूरा विवाद शुक्रवार को भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय AI समिट के दौरान शुरू हुआ था, जहां यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शर्टलेस प्रदर्शन किया था। भाजपा ने इसे देश की छवि से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कड़ी आलोचना की, जबकि कांग्रेस का कहना है कि यह प्रदर्शन बेरोजगारी और डेटा सुरक्षा जैसे मुद्दों को उठाने के लिए किया गया था। इसी घटनाक्रम के विरोध में मध्यप्रदेश के कई शहरों में भाजयुमो ने प्रदर्शन आयोजित किए। ग्वालियर में भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने रैली निकालकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी का पुतला दहन किया और नारेबाजी की।