MP सरकार के मंत्री विजय शाह की नोटशीट से आदिवासी विधि सलाहकार की नियुक्ति रद्द, मंत्री ने लिखा- "वह मेरे परिवार की विरोधी"

06:37 PM Mar 29, 2025 | Ankit Pachauri

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार के जनजातीय कार्य विभाग मंत्री विजय शाह की एक नोटशीट के आधार पर राजभवन सचिवालय की जनजातीय सेल में हुई आदिवासी विधि सलाहकार की नियुक्ति मात्र सात दिनों में रद्द कर दी गई। यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि नियुक्त विधि सलाहकार सोनल दरबार मंत्री शाह के विरोधी परिवार से संबंध रखती हैं। सोनल दरबार इंदौर संभाग की निवासी हैं। यह निर्णय तब सामने आया जब शुक्रवार को उनकी नियुक्ति को रद्द करने का आदेश जारी कर दिया गया। आदेश जारी होते ही राजभवन सहित अन्य संबंधित विभागों को इसकी जानकारी भेज दी गई।

एक दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित समाचार के अनुसार, मौजूदा विधि सलाहकार विक्रांत सिंह कुमरे का कार्यकाल समाप्त हो रहा था। इसी कारण राजभवन के प्रस्ताव पर 21 मार्च को सोनल दरबार की नियुक्ति का आदेश जारी किया गया था। यह नियुक्ति 8 अप्रैल से प्रभावी होने वाली थी। लेकिन, जैसे ही मंत्री विजय शाह को इसकी जानकारी मिली, उन्होंने उच्च स्तर पर एक नोटशीट भेजी, जिसमें उन्होंने इस नियुक्ति पर आपत्ति जताई।

सूत्रों के अनुसार, यह नोटशीट संबंधित विभाग को भेजी गई, जिसके बाद इसमें लिखे तथ्यों के आधार पर सोनल दरबार की नियुक्ति स्थगित कर दी गई। बताया गया कि सोनल दरबार इंदौर में वकील हैं और वह मंत्री शाह के विरोधी परिवार से संबंध रखती हैं।

नोटशीट में क्या लिखा था?

मंत्री विजय शाह द्वारा भेजी गई नोटशीट में स्पष्ट रूप से लिखा था कि, "रजूर (खालवा) की रहने वाली सोनल दरबार मेरे विरोधी परिवार से हैं। वह इंदौर संभाग की रहने वाली हैं। इससे पहले से ही इंदौर संभाग की एक महिला सदस्य जनजातीय सेल में कार्यरत हैं। चूंकि जनजातीय सेल में पूरे प्रदेश का प्रतिनिधित्व हो सके, इसलिए जरूरी है कि जबलपुर संभाग से किसी जनजातीय महिला को नियुक्त किया जाए।"

इसी बीच, राजभवन के जनजातीय सेल के अध्यक्ष और पूर्व अपर मुख्य सचिव दीपक खांडेकर का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया गया है। यह आदेश भी 21 मार्च 2025 को ही जारी किया गया था। इसके साथ ही जनजातीय सेल में विषय विशेषज्ञ के तौर पर कार्यरत दीपमाला रावत का कार्यकाल भी बढ़ाया गया है। दीपक खांडेकर को 2022 में इस सेल में नियुक्त किया गया था।

राजभवन के अपर मुख्य सचिव केसी गुप्ता ने बताया कि जनजातीय सेल के लिए तीन नामों के प्रस्ताव राजभवन से सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) को भेजे गए थे। इनमें से दो के कार्यकाल में वृद्धि की गई, जबकि सोनल दरबार के मामले में आदेश को स्थगित कर दिया गया है।

नियुक्ति रद्द होने पर सवाल

इस घटनाक्रम के बाद कई राजनीतिक विश्लेषकों और विपक्षी दलों ने इस नियुक्ति को रद्द किए जाने की मंशा पर सवाल उठाए हैं। इसे सत्ता पक्ष की राजनीतिक रणनीति बताया जा रहा है, जहां नेताओं के विरोधी व्यक्तियों को महत्वपूर्ण पदों से दूर रखा जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि यह फैसला योग्यता के बजाय राजनीतिक संबद्धता के आधार पर लिया गया है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

द मूकनायक से बातचीत में मध्यप्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने कहा, "क्या किसी व्यक्ति का राजनीतिक विरोधी परिवार से संबंध होना उसकी योग्यता पर भारी पड़ सकता है?" उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि जो पार्टी कांग्रेस पर परिवारवाद का आरोप लगाती है, उसे पहले अपने भीतर झांकना चाहिए। उन्होंने कहा, कि इस तरह के फैसले लोकतंत्र को कमजोर करते हैं और राजनीतिक पूर्वाग्रह को दर्शाते हैं। इस संबंध में हमने सरकार के मंत्री विजय शाह का पक्ष जानने के लिए फोन पर सम्पर्क करने का प्रयास किया पर उनसे बातचीत नहीं हो सकी।