2027 यूपी चुनाव में लागू हो महिला आरक्षण, अखिलेश यादव ने दी चेतावनी; प्रीपेड मीटर को बताया 'लूट'

12:43 PM May 06, 2026 | Rajan Chaudhary

लखनऊ: समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मंगलवार को केंद्र और राज्य सरकार से एक अहम मांग की है। उन्होंने कहा है कि 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में महिला आरक्षण कानून को हर हाल में लागू करने का ऐलान किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर सरकार इस पर अपनी स्थिति साफ नहीं करती है, तो सपा इस मुद्दे को लगातार उठाती रहेगी।

सपा की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में अखिलेश ने कहा कि 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) गठबंधन की यह साफ मांग है कि विपक्ष के समर्थन से संसद में पास हुए इस कानून को आगामी राज्य चुनावों में धरातल पर उतारा जाए। उन्होंने भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि उसे तुरंत 2027 के चुनावों में महिला आरक्षण लागू करने की अपनी मंशा जाहिर करनी चाहिए, या फिर खुलेआम यह स्वीकार कर लेना चाहिए कि वे महिलाओं को आरक्षण देने के विरोधी हैं।

अपनी बात को और मजबूती देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार की तरफ से कोई औपचारिक घोषणा नहीं हो जाती, तब तक उनकी पार्टी हर हफ्ते अलग-अलग मंचों पर इस विषय को जोर-शोर से उठाती रहेगी।

Trending :

इसके अलावा, अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल के राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर भी भाजपा पर तीखा तंज कसा। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां नतीजों में हेरफेर की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने नेतृत्व के फैसलों को 'मनमाना' करार देते हुए यह भी इशारा किया कि नेतृत्व की भूमिकाओं में महिलाओं की भागीदारी को और अधिक बढ़ाने की सख्त जरूरत है।

एक अन्य बयान में सपा प्रमुख ने प्रीपेड बिजली मीटर प्रणाली पर भी कड़ा प्रहार किया। इस सिस्टम को पूरी तरह से 'भ्रष्ट' बताते हुए उन्होंने दावा किया कि जनता के भारी विरोध ने ही सरकार को अपने रुख पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।

अखिलेश ने मांग की है कि प्रीपेड सिस्टम के तहत उपभोक्ताओं से जो भी अतिरिक्त बिल वसूला गया है, उसे भविष्य के बिजली बिलों में तार्किक रूप से समायोजित किया जाए। सरकार पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने सवाल किया कि जब वोटर लिस्ट से नाम काटने के लिए 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (एआई) का इस्तेमाल हो सकता है, तो फिर बिलों के सही समायोजन के लिए इसका उपयोग क्यों नहीं किया जा सकता?

उन्होंने जनता से वसूले गए इस अतिरिक्त शुल्क को 'लूट' करार दिया और इसे तुरंत वापस करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि अगर सरकार ने जल्द ही कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो समाजवादी पार्टी एक और बड़ा जन आंदोलन छेड़ने से पीछे नहीं हटेगी।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, अखिलेश यादव के इन बयानों को 2027 के यूपी विधानसभा चुनावों से पहले सपा की एक बड़ी सियासी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी अब पूरी तरह से सामाजिक न्याय, महिलाओं की भागीदारी और जन-सुविधाओं से जुड़े अहम मुद्दों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है।