ये क्या बोल गए भाजपा विधायक सुनील मणि तिवारी— "जय भीम गलत लोगों का नारा है.. क्रिमिनल पार्टी का नारा है...!"

04:48 PM Mar 25, 2025 | Geetha Sunil Pillai

गोविन्दगंज, बिहार- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक सुनील मणि तिवारी के एक विवादित बयान ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। तिवारी ने "जय भीम" नारे को लेकर ऐसा बयान दिया, जिससे बहुजन समुदाय, कार्यकर्ता और बहुजन पार्टियों में गहरा आक्रोश फैल गया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब एक पत्रकार ने उनसे हाल ही में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा राष्ट्रगान के कथित अपमान के मामले पर सवाल किया। बातचीत के दौरान तिवारी ने "जय भीम" को "गलत लोगों का नारा" और "क्रिमिनल पार्टी का नारा" करार दे दिया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर उनका यह बयान वायरल हो गया।

हाल ही में द एक्टिविस्ट के पत्रकार वेदप्रकाश ने सुनील मणि तिवारी से बिहार के सीएम नितीश कुमार द्वारा राष्ट्रगान के अपमान किये जाने के विवाद पर सवाल किए। इंटरव्यू के अंत में वेदप्रकाश ने "जय भीम, जय भारत" कहा। इस पर तिवारी ने सिर्फ "जय भारत" कहकर जवाब दिया। जब पत्रकार ने उनसे दोबारा "जय भीम" कहने का आग्रह किया, तो तिवारी ने कहा- वन्दे मातरम... "बाबासाहेब आंबेडकर हमारे पूजनीय हैं, लेकिन जय भीम क्या है..आप 'जय भीम' बोलने वाले लोग हैं , आप बताईये ..जब देश आजाद हुआ, संविधान बना, बाबासाहेब चुनाव लड़ने गए, तो उन्हें किसने हराया? कांग्रेस ने हराया ना। उन्हें आगे बढ़ने से किसने रोका?"

पत्रकार ने जब पूछा कि इसका "जय भीम" से क्या लेना-देना, तो तिवारी ने आगे कहा, "भारत रत्न देने वाली कोई पार्टी है तो वो भाजपा है, अटल जी हैं। मेरे रूम में उनकी तस्वीर भी है, हम उनका सम्मान करते हैं।" इस पर पत्रकार ने सवाल उठाया, "जय श्री राम बोलने वाले विधायक हैं, लेकिन जय भीम क्यों नहीं बोलते?" तिवारी ने तपाक से जवाब दिया, "जय भीम कौन लोग नारा देते हैं? बोलिए ना, बाबासाहेब आंबेडकर जिंदाबाद कहिए, बाबासाहेब अमर रहें कहिए। 'जय भीम' गलत लोगों का नारा है, क्रिमिनल पार्टी का नारा है। आप बोलिए, बाबासाहेब अमर रहें।"

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तिवारी के इस बयान ने बहुजन समुदाय और आंबेडकरवादियों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है। वंचित बहुजन आघाड़ी के संस्थापक और बाबासाहेब आंबेडकर के पोते प्रकाश आंबेडकर ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, "इस गधे को क्या पता जय भीम क्या है!? जय भीम सिर्फ एक नारा नहीं है। जय भीम सामाजिक न्याय, अधिकार और मन की स्वतंत्रता के लिए हमारे दावे और संघर्ष तथा अत्याचारी जाति व्यवस्था के खिलाफ प्रतिरोध का उत्सव है।"

सुनील मणि तिवारी का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इसे न सिर्फ बाबासाहेब आंबेडकर के सम्मान के खिलाफ मान रहे हैं, बल्कि इसे सामाजिक तनाव बढ़ाने वाला भी बता रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि "जय भीम" दलित समुदाय के लिए गर्व और पहचान का प्रतीक है, और इसे अपराधियों से जोड़ना बेहद आपत्तिजनक है। कुछ ने यह भी सवाल उठाया कि क्या तिवारी का यह बयान भाजपा की आधिकारिक राय को दर्शाता है, हालांकि अभी तक पार्टी की ओर से कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है।

'जय भीम' का महत्व

"जय भीम" नारा डॉ. भीमराव आंबेडकर के सम्मान में इस्तेमाल होता है और यह दलितों, वंचितों और सामाजिक न्याय के लिए लड़ने वालों की आवाज बन चुका है। यह नारा न सिर्फ एक अभिवादन है, बल्कि जाति व्यवस्था के खिलाफ प्रतिरोध और समानता की लड़ाई का प्रतीक भी है।

13 दिसंबर, 2023 को, संसद में घुसपैठियों में से एक नीलम आज़ाद ने पुलिस स्टेशन ले जाते समय "जय भीम" का नारा लगाया। यहाँ "भीम" का तात्पर्य डॉ. बी.आर. अम्बेडकर से है।

पी.टी. रामटेके के एक शोध पत्र के अनुसार , "जय भीम" का नारा अंबेडकर के करीबी सहयोगी बाबू हरदास ने दिया था। वे लिखते हैं, "हरदास 'जय राम-पति' से असहज थे - (मुझे लगता है कि यह संभवतः अंबेडकर को सम्बोधित करते हुए कहा था ) - जिससे उनका स्वागत किया गया था। एक मौलवी ने 'सलाम अलेकुम' का अर्थ समझाया,' जो मुसलमानों के बीच एक अभिवादन है । यहीं से उन्हें 'जय भीम' का विचार मिला। उन्होंने निर्णय लिया कि 'जय भीम' को अभिवादन के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए और इसका जवाब 'बल भीम' से दिया जाना चाहिए। उन्होंने 'भीम विजय संघ' के कार्यकर्ताओं की सहायता से अभिवादन के इस स्वरुप का प्रचार-प्रसार किया। बाद में, उन्होंने निर्णय लिया कि 'बाल भीम' उपयुक्त नहीं है और निर्णय लिया कि दोनों पक्षों को एक दूसरे का स्वागत 'जय भीम' से करना चाहिए।'

तिवारी के बयान को आंबेडकर के अनुयायी उनके योगदान और संघर्ष का अपमान मान रहे हैं।इस विवाद ने बिहार की सियासत में नया मोड़ ला दिया है। बहुजन समाजवादी पार्टी (बसपा) और अन्य दलित संगठनों ने तिवारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। कुछ कार्यकर्ताओं ने इसे भारतीय संविधान और लोकतंत्र के मूल्यों पर हमला बताया है। वहीं, यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या भाजपा अपने विधायक के इस बयान से दूरी बनाएगी या इसे नजरअंदाज करेगी।

फिलहाल यह मामला गर्माता जा रहा है, और सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक इसकी गूंज सुनाई दे रही है। सुनील मणि तिवारी का यह बयान न सिर्फ उनके लिए, बल्कि भाजपा के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन सकता है, खासकर बिहार जैसे राज्य में जहां जाति और सामाजिक न्याय के मुद्दे बेहद संवेदनशील हैं।