लखनऊ में 69,000 शिक्षक भर्ती मामले को लेकर प्रदर्शन: अभ्यर्थियों ने गले में मटका-झाड़ू लेकर किया विरोध, गलियों में भीख भी मांगी

04:38 PM Apr 22, 2026 | Geetha Sunil Pillai

लखनऊ- यूपी की राजधानी में बुधवार को 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने विधानसभा घेरने की कोशिश की, जहां पुलिस ने उन्हें रोककर हिरासत में ले लिया। प्रदर्शनकारियों ने गले में मटका और हाथों में झाड़ू लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

"हम दलित-पिछड़े हैं, अब हम फिर से मटका और झाड़ू लेकर चलेंगे. इस सरकार में यही हमारा भविष्य है, यही हमारा भूत काल था", विवशता और निराश होकर प्रदर्शनकारी मीडिया के सामने फूट पड़े।

सैकड़ों अभ्यर्थी बापू भवन चौराहे पर जमा हुए और भीषण धूप में सड़क पर बैठ गए। प्रदर्शन इतना बढ़ा कि पुलिस ने इन्हें जबरन हटाया, झड़पें होती रही और बाद में सभी को बसों में भरकर इको गार्डन भेज दिया ।

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प्रदर्शनकारियों का मुख्य आरोप है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की प्रभावी पैरवी नहीं कर रही है, जिससे 2020 से यह केस लटका हुआ है। अभ्यर्थियों के अनुसार, अब तक 28 से अधिक तारीखें हो चुकी हैं, लेकिन सरकार हर बार कोर्ट में सुनवाई टालने में लगी है। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने इस मामले को लेकर बीजेपी सरकार पर जमकर हमला बोला और कहा, "यूपी की बीजेपी सरकार ने 69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण का घोटाला किया है। ये युवा पिछले 4 साल से नौकरी और न्याय मांग रहे हैं, लेकिन सरकार पुलिस के दम पर इनकी आवाज को रौंद देती है। यही है बीजेपी का दलित-पिछड़ा विरोधी चेहरा"

प्रदर्शन के दौरान कई अभ्यर्थी गलियों में दुकानदारों से भीख मांगते नजर आये, जब लोगों ने कारण पूछा तो बेरोजगारों ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा, " हमें 6 सालों से विद्यालयों में होना चाहिए था लेकिन गलियों में भीख मांग रहे है, यूपी में योगीराज में हम पढ़े लिखे और सभी मानकों को पूरा करने के बावजूद भीख और चन्दा मांगकर बस भाड़ा देकर यहाँ आते हैं, हम पिछड़े और दलित होने का भुगतान भर रहे हैं!"

क्या है 69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण घोटाला?

यह पूरा विवाद दिसंबर 2018 में निकली 69,000 सहायक शिक्षकों की भर्ती से जुड़ा है। परीक्षा जनवरी 2019 में हुई और परिणाम 2020 में आया, लेकिन यहीं से विवाद शुरू हो गया । आरक्षित वर्ग (दलित, पिछड़े, आदिवासी) के अभ्यर्थियों ने पाया कि भर्ती में आरक्षण नियमावली 1994 और बेसिक शिक्षा नियमावली 1981 का खुला उल्लंघन किया गया है।

अभ्यर्थियों का आरोप है कि इसमें सरकार ने तय आरक्षण से कहीं कम कोटा दिया: ओबीसी वर्ग को 27% आरक्षण के बजाय मात्र 3.86% दिया गया। एससी वर्ग को 21% आरक्षण के बजाय मात्र 16.2% दिया गया।

इस गड़बड़ी के चलते करीब 19,000 सीटों पर तथाकथित घोटाला हुआ, जिससे अन्य वर्ग के करीब 20,000 अभ्यर्थी नौकरी से वंचित रह गए । लखनऊ हाईकोर्ट की डबल बेंच ने 13 अगस्त 2024 को इस भर्ती की पुरानी मेरिट लिस्ट को रद्द कर दिया था और सरकार को तीन महीने में नई लिस्ट बनाने का आदेश दिया था , लेकिन सरकार इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देकर मामले को टालती रही। अब करीब 7 साल बीत चुके हैं, लेकिन अभ्यर्थियों को अभी तक नियुक्ति नहीं मिली है।