MP के स्वास्थ्य तंत्र पर बड़ा सवाल — माँ को ठेले पर झेलनी पड़ी प्रसव पीड़ा, नवजात की मौत!

12:35 PM Mar 30, 2025 | Ankit Pachauri

भोपाल। मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के सैलाना नगर में स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। प्रसव पीड़ा से जूझ रही गर्भवती महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से दो बार लौटा दिया गया, जिसके बाद जब तीसरी बार उसका पति उसे ठेले गाड़ी पर अस्पताल ले जा रहा था, तो रास्ते में ही उसकी डिलीवरी हो गई और नवजात की मौत हो गई।

क्या है पूरा मामला?

सैलाना के कालिका माता रोड निवासी कृष्णा पिता देवीलाल ग्वाला, जो ठेले पर चने-सिंगदाने बेचने का काम करता है, उसने बताया कि उसकी पत्नी नीतू गर्भवती थी और 23 मार्च की सुबह प्रसव पीड़ा होने पर वे उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर गए। वहां पर मौजूद नर्स चेतना चारेल ने चेकअप के बाद बताया कि डिलीवरी में अभी दो-तीन दिन का समय है और उन्हें घर जाने की सलाह दी। कृष्णा अपनी पत्नी को घर ले आया, लेकिन रात में एक बजे फिर से तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई।

एक बजे रात को जब वह पत्नी को लेकर दोबारा अस्पताल पहुंचा, तो वहां ड्यूटी पर मौजूद नर्स गायत्री पाटीदार ने चेकअप के बाद बताया कि डिलीवरी में अभी 15 घंटे का समय है और उसे भर्ती करने से मना कर दिया। कृष्णा एक बार फिर पत्नी को घर ले गया।

रास्ते में ठेले पर हुई डिलीवरी, नवजात की मौत

लगभग एक घंटे बाद ही नीतू को असहनीय दर्द हुआ, जिसके बाद कृष्णा ने ठेले गाड़ी पर रखकर उसे अस्पताल ले जाने की कोशिश की, लेकिन रास्ते में ही उसकी डिलीवरी हो गई। जब वे अस्पताल पहुंचे, तो डॉक्टरों ने बताया कि नवजात की मौत हो चुकी है। इस घटना के बाद कृष्णा ने एसडीएम मनीष जैन को शिकायत दी और अस्पताल प्रशासन को दोषी ठहराते हुए कार्रवाई की मांग की।

इस मामले पर नर्स चेतना चारेल ने कहा कि उन्होंने महिला की जाँच की थी और उसे तुरंत अस्पताल छोड़ने के लिए नहीं कहा था। वहीं, नर्स गायत्री पाटीदार ने कहा कि रात में जब महिला अस्पताल आई, तो उसने कागज नहीं दिखाए और चेकअप से पहले ही अस्पताल से बाहर चली गई थी। जब वह दोबारा आई, तो नवजात का पैर बाहर था और सिर अंदर था, जिससे डिलीवरी में जटिलता आई और नवजात मृत पैदा हुआ। उन्होंने किसी भी तरह की लापरवाही से इनकार किया।

23 मार्च को दिन में डॉक्टर जितेंद्र रायकवार और रात में डॉक्टर शैलेष डांगे की ड्यूटी थी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में महिला डॉक्टर की ड्यूटी नहीं थी, इसलिए डिलीवरी का काम नर्सों के हवाले था। डॉ. शैलेष डांगे ने कहा कि वे अस्पताल परिसर में मौजूद रहते हैं, लेकिन डिलीवरी के मामले सीधे नर्सों के पास जाते हैं। उन्होंने कहा कि स्टाफ को महिला के दस्तावेज तैयार करने चाहिए थे।

एसडीएम मनीष जैन ने कहा कि कृष्णा ग्वाला द्वारा दी गई शिकायत प्राप्त हुई है और इस मामले की जांच की जाएगी। और जांच के बाद दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल

सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हुई लापरवाही पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने द मूकनायक से बातचीत करते हुए कहा कि अगर महिला को समय पर सही उपचार मिल जाता, तो शायद उसके नवजात की जान बचाई जा सकती थी। यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत को उजागर करती है, जहां गरीब परिवारों को लापरवाही का शिकार होना पड़ता है। विधायक ने बताया कि उन्होंने क्षेत्र की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कई बार शासन-प्रशासन को पत्र लिखे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

विधायक कमलेश्वर डोडियार ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त किया जाए और इस घटना की जांच कर दोषी डॉक्टरों व कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक परिवार की पीड़ा नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र की जनता ऐसी लापरवाहियों का सामना कर रही है। सरकार को तत्काल इस दिशा में कदम उठाने की जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।