भोपाल। मध्यप्रदेश के सतना जिले के मझगवां ब्लॉक स्थित सुरांगी गांव में 4 माह की मासूम बच्ची सुप्रांशी की कुपोषण से हुई मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. मनोज शुक्ला ने प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर सात स्वास्थ्यकर्मियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर निर्धारित समय में जवाब तलब किया है। विभाग ने साफ कर दिया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
कम वजन में हुआ था जन्म
जांच रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रांशी और उसके भाई नैतिक का जन्म सामान्य से कम वजन के साथ हुआ था। सुप्रांशी का जन्म के समय वजन मात्र 2 किलोग्राम और नैतिक का 1.90 किलोग्राम था, जो गंभीर रूप से कम माना जाता है। दोनों नवजातों की हालत को देखते हुए उन्हें उच्च स्तरीय उपचार के लिए रीवा रेफर किया जा रहा था, लेकिन एंबुलेंस में शिफ्ट करते समय सुप्रांशी की मौत हो गई। यह घटना न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं की कमजोरी को दिखाती है, बल्कि समय पर हस्तक्षेप की कमी को भी उजागर करती है।
संयुक्त जांच में कई स्तरों पर लापरवाही सामने आई
महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त जांच रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों की समय पर स्क्रीनिंग नहीं की गई, जिससे उनकी स्थिति का सही आकलन नहीं हो सका। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नयागांव की आरबीएसके मेडिकल ऑफिसर डॉ. पूजा शुक्ला पर आरोप है कि उन्होंने उच्च जोखिम वाले बच्चों की पहचान में लापरवाही बरती और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण नहीं किया।
इसके अलावा, बच्ची में उल्टी, दस्त, कुपोषण और डिहाइड्रेशन जैसे गंभीर लक्षण होने के बावजूद न तो उसकी सही ट्रैकिंग की गई और न ही आवश्यक फॉलोअप किया गया। परिजनों को समय रहते बेहतर इलाज के लिए रेफर नहीं किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि एएनएम, सीएचओ और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय की कमी रही, जिससे स्थिति और बिगड़ती गई।
सात कर्मचारियों पर गिरी गाज, मांगा गया जवाब
इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग ने सात कर्मचारियों को जिम्मेदार मानते हुए नोटिस जारी किए हैं। इनमें आरबीएसके मेडिकल ऑफिसर डॉ. पूजा शुक्ला के अलावा डॉ. धनेश द्विवेदी, सेंट्रल मेडिकल ऑफिसर डॉ. धनेन्द्र पाण्डेय, ब्लॉक कम्युनिटी मोबिलाइजर देवमुनि पटेल, सेक्टर सुपरवाइजर कमलेश चंद्र सिंह, सीएचओ डॉ. पुष्पेंद्र गुप्ता और उप स्वास्थ्य केंद्र चौबेपुर की एएनएम विद्या चक्रवर्ती शामिल हैं।
सीएमएचओ ने सभी संबंधित कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे तय समय सीमा के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करें। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो संबंधितों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य तंत्र पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत को सामने ला दिया है। कुपोषण जैसे गंभीर मुद्दे पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई न होना और विभागों के बीच समन्वय की कमी कई सवाल खड़े करती है। खासकर तब, जब सरकार द्वारा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, ऐसे में इस तरह की घटनाएं उन योजनाओं की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़ा करती हैं।