+

चाइल्ड राइट्स प्रोटेक्शन पर उदयपुर में हुई वर्कशॉप,राजस्थान हाई कोर्ट जस्टिस ने कहा...

उदयपुर- शहर के एक निजी होटल में रविवार को आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में बाल अधिकारों के हनन के बढ़ते मामलों और पीड़ित बच्चों को न्याय दिलाने के लिए गंभीर चर्चा हुई। गायत्री सेवा संस्थान, यूनिसेफ, जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन और बाल अधिकारिता विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में न्यायपालिका, प्रशासन, सामाजिक संस्थाओं और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं किशोर न्याय समिति के अध्यक्ष मनोज गर्ग ने मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए बाल संरक्षण के लिए समस्या पूर्व समाधान पर जोर दिया और गायत्री सेवा संस्थान द्वारा जनजातीय क्षेत्रों में चलाई जा रही बाल संसद और सीएनसीपी पहल की सराहना की।

गर्ग ने कहा, " बाल अधिकरो के हनन के मामले प्रतिदिन सामने आ रहे है, पीड़ित बच्चों को न्याय मिले इसके लिए न्यायालय सहित प्रशासन सक्रिय है, परन्तु बाल संरक्षण सुनिश्चित करने हेतु सामूहिक, सतत एवं त्वरित प्रयास करने होंगे। समस्या पूर्व समाधान पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला निश्चित ही सराहनीय प्रयास है।" गर्ग ने  बाल संरक्षण के लिए "समस्या पूर्व समाधान" (Preventive Approach) पर ध्यान देना होगा। उन्होंने गायत्री सेवा संस्थान द्वारा जनजातीय क्षेत्रों में चलाई जा रही बाल संसद और CNCP (Child in Need of Care and Protection) पहल की सराहना की।

राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश मनोज गर्ग

बाल अधिकारों पर चुनौतियाँ पर बात करते हुए गायत्री सेवा संस्थान के डॉ. शैलेंद्र पंड्या (बाल अधिकार विशेषज्ञ) ने राजस्थान में बच्चों के खिलाफ हो रहे अपराधों और सुरक्षा उपायों पर चर्चा की। पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से किशोर न्याय समितियों के लिए एक कार्य योजना तैयार करने पर ज़ोर दिया गया।

कार्यक्रम में अतिथि वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए यूनिसेफ राजस्थान की बाल संरक्षण अधिकारी हिमाली ने भारत सरकार की विभिन्न योजनाए मिशन वात्सल्य, समेकित बाल संरक्षण योजना की जानकारी दी।

कुलदीप शर्मा (DLSA सचिव) ने उदयपुर के आदिवासी इलाकों में बाल संरक्षण की समस्याओं को उजागर किया।

डॉ. सुमतिलाल बोहरा (सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी), ओमप्रकाश (सामाजिक कार्यकर्ता), डॉ. शरदचंद्र पुरोहित (पूर्व निदेशक, SCPCR), और ध्रुव कुमार कविया (राजस्थान बाल आयोग) ने भी अपने विचार रखे।

पूरे दिन चली कार्यशाला में प्रदेश के बाल अधिकरिता विभाग के अधिकारी, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष एवं सदस्य, विधिक सेवा प्राधिकरण सहित बच्चों के मुद्दों पर प्रयासरत अन्तराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय संस्थाओ के प्रतिनिधि एवं बाल संसद के बाल प्रतिनिधि उपस्थिति रहे।

facebook twitter