मणिपुर हिंसा: महिलाओं से दरिंदगी मामले में 6 आरोपियों पर आरोप तय, गुवाहाटी में चलेगा ट्रायल

11:19 AM Jan 09, 2026 | Rajan Chaudhary

गुवाहाटी: मणिपुर में भड़की जातीय हिंसा के दौरान मानवता को शर्मसार कर देने वाले एक मामले में न्याय की दिशा में उम्मीद भारी खबर सामने आ रही है। गुवाहाटी की एक विशेष सीबीआई अदालत ने उस नृशंस घटना के छह आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं, जिसमें 4 मई, 2023 को भीड़ द्वारा तीन महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाया गया था। इस दिल दहला देने वाली घटना में दिनदहाड़े दो महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था और उनमें से एक के दो रिश्तेदारों की हत्या कर दी गई थी। अदालत ने इन सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा (ट्रायल) चलाने का आदेश दिया है।

सीबीआई जांच का पहला मामला जो ट्रायल तक पहुंचा

यह मणिपुर हिंसा से जुड़ा पहला ऐसा मामला है जिसकी जांच सीबीआई (CBI) कर रही थी और अब यह ट्रायल के स्टेज तक पहुंच गया है। केंद्रीय एजेंसी ने मणिपुर अशांति से जुड़ी कुल 27 एफआईआर (FIR) अपने हाथ में ली हैं। इनमें से 19 मामले महिलाओं के खिलाफ अपराध, तीन शस्त्रागार लूट, दो हत्याएं और दंगा, अपहरण व आपराधिक साजिश के एक-एक मामले शामिल हैं।

Trending :

आरोपियों ने खुद को बताया निर्दोष

बीते शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश छत्र भुखन गोगोई ने फैसला सुनाया कि सभी छह आरोपियों पर "इस अदालत द्वारा मुकदमा चलाया जाएगा।" मणिपुर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए आरोपियों को जब आरोप पढ़कर सुनाए गए और समझाए गए, तो उन्होंने खुद को दोषी नहीं माना।

सीबीआई अभियोजक स्वयंजीत शर्मा ने अदालत को बताया कि जांच में पर्याप्त सामग्री मिली है और आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया (prima facie) मजबूत मामला बनता है। वहीं, बचाव पक्ष के वकीलों ने दलील दी कि चार्जशीट में सूचीबद्ध सभी अपराधों के लिए आरोप तय करने हेतु सबूत पर्याप्त नहीं हैं।

आरोपियों को गुवाहाटी लाने का आदेश

अदालत ने मणिपुर सेंट्रल जेल, साजीवा में बंद चार आरोपियों— हुइरेम हेरोदास मैतेई, निंगोम्बम तोम्बा सिंह (उर्फ तोमथिन), युमलेम्बम जिबन सिंह (उर्फ नाओचा उर्फ सना) और पुखरीहोंगबम सुरंजय मैतेई—को 16 जनवरी को आरोपों पर हस्ताक्षर करने और फिजिकली रूप से पेशी के लिए गुवाहाटी स्थानांतरित करने का आदेश दिया है।

इसके अलावा, जमानत पर बाहर चल रहे दो अन्य आरोपियों— अरुण खुंडोंगबम (उर्फ नानाओ) और नेमइराकपम किरण मैतेई—को उसी तारीख (16 जनवरी) को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का कड़ा निर्देश दिया गया है।

न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा, "चूंकि मुकदमे के दौरान आरोपियों की पहचान का सवाल शामिल है, इसलिए निष्पक्ष सुनवाई और सुविधा के लिए आरोपियों की भौतिक उपस्थिति (Physical Production) आवश्यक है।"

इन धाराओं में तय हुए आरोप

आरोपियों पर कुकी और मैतेई समुदायों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने, छेड़छाड़, यौन उत्पीड़न, सामूहिक बलात्कार, शारीरिक हमला, आपराधिक साजिश, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और लूटपाट के आरोप लगाए गए हैं। इसके साथ ही, उन पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) के तहत भी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।