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महाराष्ट्र में प्याज की कीमतों में भारी गिरावट: 50 पैसे किलो बिक रहा प्याज, कर्ज के बोझ तले दब रहे किसान

नई दिल्ली: महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक किसान इन दिनों एक गहरे संकट से गुजर रहे हैं। कीमतों में आई भारी गिरावट ने उन्हें कर्ज के जाल में धकेल दिया है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आठ मई को नासिक के सताना तालुका स्थित कृषि उपज मंडी समिति (एपीएमसी) में जब जितेंद्र सोलंके अपनी उपज लेकर पहुंचे, तो उन्हें महज 50 पैसे प्रति किलो का भाव मिला।

करेगांव गांव के इस सीमांत किसान ने अपनी 1.5 एकड़ जमीन पर प्याज उगाने के लिए एक लाख रुपये से ज्यादा खर्च किए थे। लेकिन उन्हें अपनी मेहनत का मोल सिर्फ अठन्नी प्रति किलो के रूप में मिला, जिससे वे अपनी लागत का एक हिस्सा भी नहीं निकाल सके।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जितेंद्र सोलंके का कहना है कि उनका प्याज मध्यम आकार का था, ना कि छोटे आकार वाली 'गोल्टी' किस्म का जिसे अमूमन कम दाम मिलते हैं। मंडी में पूरा दिन इंतजार करने के बाद केवल एक ही व्यापारी उनके पास आया और उसने यही निराशाजनक कीमत तय की। एपीएमसी अधिकारियों से शिकायत करने पर भी उन्हें कोई मदद नहीं मिली और मजबूरी में उन्हें अपनी फसल इसी कौड़ियों के भाव पर बेचनी पड़ी।

आंकड़ों पर गौर करें तो इस सीजन में सोलंके ने स्थानीय साहूकार से कर्ज लेकर एक लाख रुपये से अधिक का निवेश किया था। बेमौसम बारिश की मार झेल चुकी उनकी करीब 100 क्विंटल की पूरी फसल से उन्हें मात्र 15,000 रुपये की कमाई हुई। अब उनके सिर पर मूलधन और बढ़ते ब्याज सहित 85,000 रुपये का भारी कर्ज बकाया है।

इस हालात को जो बात और भी दर्दनाक बनाती है, वह है समय। इससे ठीक छह दिन पहले, दो मई को उसी खेत से निकले प्याज की कीमत 3.50 रुपये प्रति किलो मिली थी। सोलंके की सरकार से गुहार है कि प्याज का न्यूनतम भाव कम से कम 20 रुपये प्रति किलो तय किया जाए। उनका साफ कहना है कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो किसानों की आत्महत्या के मामले और बढ़ जाएंगे क्योंकि उनके पास आजीविका का कोई दूसरा साधन नहीं बचा है।

सोलंके की यह व्यथा पूरे महाराष्ट्र के प्याज बेल्ट की एक आम कहानी बन चुकी है। इस संकट की सबसे खौफनाक तस्वीर छत्रपति संभाजीनगर से सामने आई, जहां भुगतान की एक रसीद सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। पैठण तालुका के वरुडी गांव के 45 वर्षीय किसान प्रकाश गलाधर तीन मई को 1,262 किलो वजन वाली प्याज की 25 बोरियां लेकर पैठण एपीएमसी पहुंचे थे। नीलामी के बाद उनकी कुल कमाई 1,262 रुपये हुई, यानी उन्हें सिर्फ 1 रुपये प्रति किलो का भाव मिला।

असली झटका उन्हें तब लगा जब परिवहन, तुलाई, भंडारण और हैंडलिंग जैसे खर्चे काटे गए। ये कटौतियां उनकी नाममात्र की कमाई से भी ज्यादा हो गईं और अंत में उन्हें बताया गया कि उलटा उन पर व्यापारी का एक रुपया बकाया है।

गलाधर ने बताया कि उन्होंने करीब 12 क्विंटल प्याज बेचा और सारे खर्च कटने के बाद उनके हाथ में कुछ नहीं आया। उल्टे उन पर एक रुपये का कर्ज चढ़ गया, जिसके चलते उन्होंने अपना बाकी बचा हुआ प्याज वहीं फेंक दिया क्योंकि उसे वापस ले जाने का कोई फायदा नहीं था।

एक किसान द्वारा पूरे सीजन की कड़ी मेहनत के बाद व्यापारी को एक रुपया देने की यह रसीद व्हाट्सएप ग्रुपों और इंस्टाग्राम पर प्याज की खेती के अर्थशास्त्र की नाकामी का सबसे बड़ा प्रतीक बन गई। गलाधर की परेशानियां खेतों तक ही सीमित नहीं हैं। कुछ साल पहले उन्होंने अपनी बेटी की शादी की थी, जिसका आर्थिक बोझ आज भी उन पर है। उन पर अभी भी कर्जदाताओं के पांच लाख रुपये से ज्यादा का बकाया है और इस ताजा प्याज संकट ने उन्हें पूरी तरह से तोड़ कर रख दिया है।

गलाधर की उपज खरीदने वाले पैठण एपीएमसी के एक व्यापारी इब्राहिम बागवान ने मीडिया से बातचीत में इस गिरावट के दो मुख्य कारण बताए। उनके मुताबिक कर्नाटक, तेलंगाना और अन्य राज्यों में प्याज की बंपर आवक हुई है। जो स्थानीय खेप पहले उन राज्यों में जाती थी, वह अब महाराष्ट्र की मंडियों में ही बेची जा रही है जिससे ओवरसप्लाई की स्थिति बन गई है और कीमतें औंधे मुंह गिर गई हैं।

व्यापारी ने यह भी दावा किया कि गलाधर की फसल औसत से कम गुणवत्ता वाली थी। उसी मंडी में अच्छी किस्म के प्याज को फिलहाल सात से 10 रुपये प्रति किलो का भाव मिल रहा है।

व्यापारियों का मानना है कि कीमतों में यह भारी गिरावट एक साथ कई कारकों के मिलने का नतीजा है। एग्रो इंडी एक्जिम प्राइवेट लिमिटेड के मालिक और पुणे के गुलटेकड़ी थोक बाजार के व्यापारी शिवम धुमाल ने बताया कि महाराष्ट्र में हुई बेमौसम बारिश ने मौजूदा स्टॉक की शेल्फ लाइफ (भंडारण क्षमता) को नुकसान पहुंचाया है। खराब गुणवत्ता के कारण कीमतें निचले स्तर पर हैं और फिलहाल गुलटेकड़ी मंडी में थोक भाव 5 से 12 रुपये प्रति किलो के बीच चल रहा है।

धुमाल ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर भी निर्यात मांग पर पड़ने की बात कही। निर्यात में कमी आने से घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ गई है। हालांकि, उन्हें उम्मीद है कि जून तक कीमतें सुधरकर 20 से 25 रुपये और दिवाली के आसपास 35 से 40 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती हैं।

इस गंभीर संकट के बीच किसान प्रतिनिधियों ने सरकार से तुरंत कदम उठाने की मांग की है। महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के अध्यक्ष भरत दिघोले ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। उन्होंने सरकार से अल्पावधि राहत के तौर पर 1,500 रुपये प्रति क्विंटल की सब्सिडी देने की मांग की है।

साथ ही यह भी कहा है कि नेफेड (Nafed) और एनसीसीएफ (NCCF) तुरंत खरीद शुरू करें। यह खरीद सिर्फ एपीएमसी मंडियों से होनी चाहिए ताकि बिचौलियों को दूर रखा जा सके और इसका सीधा फायदा असली किसान तक पहुंचे।

ढांचागत सुधारों पर जोर देते हुए दिघोले ने कहा कि उर्वरक, बीज, मजदूरी, सिंचाई, भंडारण और परिवहन जैसी बढ़ती लागतों को देखते हुए प्याज की खरीद के लिए न्यूनतम मूल्य 3,000 रुपये प्रति क्विंटल (30 रुपये प्रति किलो) तय किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इस तरह के सुरक्षा कवच के बिना किसान हर मौसम में बाजार के रहमोकरम पर निर्भर रहने को मजबूर होंगे।

इस अहम मुद्दे पर एनसीपी (एसपी) सांसद सुप्रिया सुले ने भी अपनी बात रखी है और राज्य सरकार से कड़े कदम उठाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह बेहद निराशाजनक है कि कड़ी मेहनत करने वाले सीमांत किसानों को सिर्फ एक रुपये प्रति किलो का भाव मिल रहा है। सुले ने जोर देकर कहा कि इन किसानों को न्याय मिलना चाहिए और सरकार को तत्काल बीच-बचाव करते हुए लाभकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

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