रायपुर: छत्तीसगढ़ के बर्खास्त बीएड प्रशिक्षित सहायक शिक्षकों ने सोमवार को एक मार्मिक प्रदर्शन करते हुए राज्य विधानसभा के बाहर घुटनों के बल चलकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अपनी समस्या सुनाने की कोशिश की। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने उन्हें तूता धरना स्थल पर ही रोक दिया। कड़क धूप में यह दृश्य काफी दिल दहला देने वाला था, जहां निराश शिक्षकों ने "समायोजन या बहाली" की मांग को लेकर अपना आंदोलन जारी रखा।
24 मार्च को छत्तीसगढ़ विधानसभा की रजत जयंती के उपलक्ष्य में राष्ट्रपति प्रदेश की जनता को संबोधित कर रही हैं। वहीं दूसरी ओर अपने हक और सेवा सुरक्षा की मांग को लेकर बर्खास्त आदिवासी बी.एड. प्रशिक्षित सहायक शिक्षक एवं शिक्षिकाएं घुटनों के बल चलकर सरकार से न्याय की गुहार लगा रहे थे। शिक्षकों ने कहा- क्या यह विडंबना नहीं कि जिस प्रदेश में आज़ादी, लोकतंत्र और आदिवासी सशक्तिकरण की बातें हो रही हैं, वहीं हजारों आदिवासी शिक्षक अपने भविष्य के अंधकार में संघर्षरत हैं?
राष्ट्रपति मुर्मु ने विधानसभा परिसर में कदम्ब का पौधारोपण किया लेकिन तीन महीने से अपनी नौकरी बचाने और समायोजन की मांग को लेकर आन्दोलन कर रहे 2,897 बीएड प्रशिक्षित शिक्षक उनसे मिल नहीं सके सके।
इन शिक्षकों की मुश्किलें तब शुरू हुईं जब दिसंबर 2024 में हाई कोर्ट ने इनकी सेवा समाप्ति के आदेश कर दिए। इससे पूर्व सुप्रीमकोर्ट ने कहा कि प्राथमिक शिक्षक बनने के लिए केवल डीएलएड (Diploma in Elementary Education) धारक ही योग्य हैं, जिसके बाद राज्य सरकार ने 2,897 बीएड प्रशिक्षित शिक्षकों को नौकरी से हटा दिया। इनमे से अधिकांश टीचर्स आदिवासी हैं।
इसके बाद से ये शिक्षक लगातार आंदोलन कर रहे हैं – उन्होंने 350 किमी की पदयात्रा की, जल सत्याग्रह किया, भूख हड़ताल की और यहां तक कि अपने खून से पत्र लिखकर मुख्यमंत्री को भेजे। लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
रायपुर में सोमवार को मौसम के तेवर भी सख्त थे, कडक धूप में सहायक शिक्षक शिक्षिकाएं अपने घुटनों के बल रेंगते हुए प्रदर्शन करने लगे. आंदोलनरत टीचर्स ने बताया कि प्रेसिडेंट द्रौपदी मुर्मू के आगमन व विधानसभा में अभिभाषण के मद्देनजर बर्खास्त बीएड प्रशिक्षित सहायक शिक्षक राष्ट्रपति से अपनी समस्या के समाधान हेतु मिलने की कोशिश कर रहे थे लेकिन पुलिस प्रशासन द्वारा सभी को तूता धरना स्थल पर ही रोक दिया गया।
एक शिक्षक अश्विनी कुर्रे ने कहा, " मेरा सरकार से बस ये प्रश्न है कि वे हमे ये बस बता दे कि हम सहायक शिक्षकों का गलती क्या है जिसके वजह से हमे बर्खास्त किया गया? क्या बिना गलती के हमे सजा मिलना सही है? हम निर्दोष सहायक शिक्षक को समाज से क्या क्या यातना सहना पड़ रहा है. केवल हम ही जानते है हमारी मनोदशा बिल्कुल भी सही नहीं है। हमारी सामाजिक प्रतिष्ठा,हमारा आत्म सम्मान दांव पर लगा है और कुछ लोगों को अभी भी इसमें राजनीति करनी है l यदि हममे से किसी को कुछ हो गया तो इसका जवाबदारी केवल और केवल सरकार की होगीl"
शिक्षकों का घुटनों के बल विधान सभा जाने का निर्णय उनके दर्द और न्याय की पुकार को दर्शाता है, लेकिन पुलिस ने उन्हें तूता धरना स्थल पर ही रोक दिया। टीचर्स का कहना है कि CGBEd समायोजन की मांगों को सरकार लगातार अनदेखा कर रही है। शिक्षक शांतिपूर्ण तरीकों से अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन उनकी आवाज दबा रहा है।
निखिल डिक्सेना ने राष्ट्रपति को गुहार लगाई और कहा, " 2900 बी.एड. सहायक शिक्षकों की चीत्कार सुनें—ये वो लोग हैं जिन्होंने बच्चों के सपनों को पंख दिए, मगर आज खुद घुटनों पर रेंगते हुए अपनी जिंदगी की भीख माँग रहे हैं। सरकारी नौकरी छिन जाने से इनके घरों में चूल्हे ठंडे पड़े हैं, बच्चों की किलकारियाँ थम गई हैं, और आँखों से आँसू नहीं, खून बह रहा है। हर कदम पर टूटता विश्वास, हर साँस में बेबसी की टीस—यह समायोजन की माँग नहीं, बल्कि इनके जख्मी दिलों की अंतिम पुकार है। कृपया इनकी बुझती आशाओं को रोशनी दें, इनके परिवारों की मुरझाती जिंदगियों को बचाएँ।"