भोपाल। मध्य प्रदेश में नर्सिंग फर्जीवाड़े से जुड़े मामले में हाईकोर्ट की स्पेशल बेंच ने एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि अपात्र नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों को एक महीने के भीतर योग्य (सूटेबल) कॉलेजों में ट्रांसफर किया जाए। यह फैसला छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से लिया गया है।
हाईकोर्ट की स्पेशल बेंच, जिसमें जस्टिस संजय द्विवेदी और जस्टिस अचल कुमार पालीवाल शामिल थे, उन्होंने एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किए।
कोर्ट ने सरकार को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि जिन कॉलेजों को अपात्र घोषित किया गया है, उनके छात्रों को शीघ्र ही वैध कॉलेजों में स्थानांतरित किया जाए ताकि उनकी पढ़ाई बाधित न हो।
सरकार ने पेश की 600 फाइलें
राज्य सरकार ने अपात्र कॉलेजों की मान्यता और संबद्धता से संबंधित 17 बस्तों में करीब 600 ओरिजिनल फाइलें कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत कीं। इन फाइलों को दो लोडिंग ऑटो के माध्यम से अदालत तक लाया गया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को इन सभी फाइलों का 15 दिनों के भीतर अवलोकन करने का निर्देश दिया है और कहा है कि वे एक रिपोर्ट प्रस्तुत करें, जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि किन परिस्थितियों में, किन अधिकारियों द्वारा अपात्र कॉलेजों को अनुमति प्रदान की गई।
छात्र नहीं तो परीक्षा नहीं
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन नर्सिंग कॉलेजों में सीबीआई जांच के दौरान किसी भी छात्र का नामांकन नहीं पाया गया, उन कॉलेजों के छात्रों को परीक्षा में बैठने की पात्रता नहीं दी जाएगी। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को अवगत कराया कि कई कॉलेजों ने सीबीआई जांच के दौरान यह दावा किया था कि उनके पास कोई भी छात्र नामांकित नहीं है। लेकिन बाद में, बैकडेट में एडमिशन दिखाकर छात्रों को परीक्षा में बैठाने की कोशिश की गई।
नर्सिंग शिक्षा में सुधार की दिशा में बड़ा कदम
हाईकोर्ट के इस फैसले को नर्सिंग शिक्षा में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस फैसले से उन हजारों छात्रों को राहत मिलेगी जो अपात्र कॉलेजों में नामांकित थे और अपने भविष्य को लेकर चिंतित थे।
जानिए क्या है नर्सिंग घोटाला?
साल 2020-21 में कोरोना काल के दौरान कुछ अस्पताल खोले गए थे। इसी की आड़ में कई नर्सिंग कॉलेज भी खोल दिए गए थे। कॉलेज खोलने के लिए मेडिकल यूनिवर्सिटी और चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा बनाए नियमों के मुताबिक नर्सिंग कॉलेज खोलने के लिए 40 हजार स्क्वेयर फीट जमीन का होना जरूरी होता है। साथ ही 100 बिस्तर का अस्प्ताल भी होना आवश्यक है। इसके बाबजूद प्रदेश में दर्जनों ऐसे नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता दी गई, जो इन नियमों के अंर्तगत नहीं थे। इसके बाद भी इन्हें मान्यता दे दी गई।
याचिकाकर्ता और जबलपुर हाई कोर्ट में वकील विशाल बघेल ने ऐसे कई कॉलेज की तस्वीरें और जानकारी कोर्ट को सौंपी थी। इसमें बताया कि कैसे कॉलेज के नाम पर घोटाला चल रहा है। हाई कोर्ट ने इस मामले को देखते हुए नर्सिंग कॉलेज में होने वाली परीक्षाओं पर रोक लगा दी थी।