BHU में दलित छात्र को पीएचडी दाखिले का मसला: मछलीशहर MLA डॉ. रागिनी सोनकर और नगीना MP चंद्रशेखर आजाद ने पत्र में कहा— प्रकिया सामाजिक न्याय के खिलाफ!

12:39 PM Mar 24, 2025 | Geetha Sunil Pillai

वाराणसी- काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) में पीएचडी प्रवेश को लेकर दलित छात्र शिवम सोनकर के साथ हुए अन्याय के मामले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। मछलीशहर की विधायक डॉ. रागिनी सोनकर और नगीना के सांसद चंद्रशेखर आजाद ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और BHU कुलपति को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

शिवम सोनकर ने BHU के मालवीय शांति अनुसंधान केंद्र में 2024-25 सत्र के लिए पीस रिसर्च विषय में पीएचडी के लिए आवेदन किया था। उन्होंने सामान्य श्रेणी की RET (रिसर्च एंट्रेंस टेस्ट) परीक्षा में दूसरा स्थान हासिल किया, लेकिन उन्हें प्रवेश नहीं मिला। शिवम का आरोप है कि विभाग में RET Exempted श्रेणी की तीन सीटें खाली होने के बावजूद उन्हें प्रवेश से वंचित रखा गया है। उन्होंने कुलपति आवास के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया है और न्याय की मांग कर रहे हैं। पीएचडी में दाखिला नहीं मिला तो शिवम सोनकर फूट-फूट कर रो पड़े जिसका विडियो बीते दो दिनों में तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।

इस मामले में मछलीशहर विधायक डॉ. रागिनी सोनकर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने BHU कुलपति को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

सांसद आजाद ने लिखा, " काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया के अंतर्गत शिवम सोनकर, जिन्होंने सत्र 2024-25 में पीस रिसर्च विषय के लिए आवेदन किया है, उनके साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है। यह अत्यंत चिंताजनक है कि विभाग में RET Exempted श्रेणी की तीन सीटें खाली होने के बावजूद उन्हें नामांकन प्रक्रिया से वंचित किया जा रहा है। RET परीक्षा में सामान्य श्रेणी में रैंक 2 लाने के बावजूद उनका प्रवेश न होना प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। यदि खाली सीटों को RET मोड में परिवर्तित नहीं किया जाता, तो यह न केवल एक योग्य छात्र के साथ अन्याय होगा, बल्कि सामाजिक भेदभाव का संकेत भी देगा। शिवम सोनकर एक दलित छात्र हैं और उनके साथ हो रहे भेदभाव के आरोप बेहद गंभीर हैं। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, जो महामना मदन मोहन मालवीय द्वारा स्थापित एक महान शिक्षा संस्थान है, वहां यदि जातिगत भेदभाव जैसी प्रवृत्ति देखने को मिले तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक न्याय की अवधारणा के लिए घातक सिद्ध होगा। अतः, मैं आपसे विनम्र निवेदन करता हूँ कि इस मामले को तत्काल संज्ञान में लेते हुए निष्पक्ष जांच कर उचित कार्यवाही सुनिश्चित करें, ताकि योग्यता के आधार पर प्रवेश की प्रक्रिया निष्पक्ष रुप से पूरी हो सके। साथ ही, विश्वविद्यालय प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में किसी भी छात्र के साथ जाति, धर्म या किसी अन्य आधार पर भेदभाव न हो।"

डॉ रागिनी ने अपने पत्र में यूपी के मुख्यमंत्री को लिखा, " विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा RET में केवल 12 सीटों पर ही प्रवेश दिया जा रहा है, RET EXEMPTED की 03 सीटें खाली होने के बावजूद सोनकर को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। इस प्रकार के प्रकिया ना केवल उच्च शिक्षा में सामाजिक न्याय के खिलाफ है, बल्कि यह दलित छात्रों के शैक्षिक भविष्य के साथ भी अन्याय है। शिवम सोनकर के साथ हो रहा अन्याय सामाजिक न्याय के संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन है। यह घटना दलित छात्रों के साथ उच्च शिक्षा में हो रहे भेदभाव को उजागर करती है। "

इधर BHU प्रशासन का कहना है कि प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और नियमानुसार की गई है। विश्वविद्यालय के अनुसार, काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होने के बाद RET Exempted श्रेणी की सीटों को RET मोड में परिवर्तित नहीं किया जा सकता है।