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तमिलनाडु के इस गाँव में श्मशान भूमि को लेकर दलित और मछुआरे आमने-सामने; जानिये क्या है टकराव की वजह

विल्लुपुरम- तमिलनाडु के विल्लुपुरम जिले के कोट्टाकुप्पम इलाके में स्थित नादुकुप्पम और पेरियाकोट्टाकुप्पम गाँवों में दलित समुदाय और मछुआरों के बीच श्मशान भूमि को लेकर विवाद बीते दो तीन दिनों से चरम पर है, तनावपूर्ण स्थिति ने हिंसक रूप ले लिया। हालाँकि दोनों समुदायों के बीच विवाद काफी बरसों से चल रहा है लेकिन हाल ही में एक 76 वर्षीय वृद्ध की मृत्यु के बाद तनाव एकदम बढ़ गया। 

76 वर्षीय दलित बुजुर्ग भूमिलिंगम की शुक्रवार 5 जून को मृत्यु हो गई। जब 6 जून को उनके परिजन और पड़ोसी नादुकुप्पम स्थित सामुदायिक दफ़न भूमि पर अंतिम संस्कार के लिए पहुँचे, तो स्थानीय मछुआरों ने उन्हें रोक दिया। मछुआरों ने दलितों पर पत्थर और लाठियों से हमला कर दिया, जिसमें कई लोग घायल हो गए। स्थिति को काबो में करने के लिए 900 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात करना पड़ा, इस हमले में दलितों के कुछ घर और वहाँ मौजूद पुलिसकर्मी भी चपेट में आ गए। हमले में कम से कम 8 लोग घायल हुए।

हमले के बाद दलित समुदाय ने शव को ईस्ट कोस्ट रोड (ECR) पर रखकर सड़क जाम कर दिया। उनकी माँग थी कि हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और श्मशान भूमि विवाद का स्थायी समाधान निकले।

दो घंटे तक मुख्य मार्ग पर यातायात ठप रहा। विल्लुपुरम रेंज के DIG ए. अरुलरासु और राजस्व अधिकारियों ने वार्ता के बाद स्थिति को नियंत्रित किया। इसके बाद भूमिलिंगम का अंतिम संस्कार उसी श्मशान स्थल पर कराया गया।

विवाद की जड़ में अतिक्रमण

पेरिया कोट्टाकुप्पम में 500 से ज़्यादा आदि द्रविड़ परिवार रहते हैं। इस समुदाय का समुद्र के किनारे, नाडुकुप्पम मछली पकड़ने वाले गांव के पास एक श्मशान स्थल है, जिसकी कोई घेराबंदी नहीं है। कुछ साल पहले, मछुआरों ने अपनी नावें खड़ी करने के लिए श्मशान की ज़मीन पर कब्ज़ा करना शुरू कर दिया।

ज़िला प्रशासन से कब्ज़ा करने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की लेकिन अपील का कोई खास नतीजा नहीं निकला, तो दलित निवासियों ने मद्रास हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। कोर्ट ने अगस्त 2025 में संबंधित अधिकारियों को श्मशान भूमि से नावें हटाने का आदेश दिया।

अब मछुआरे श्मशान भूमि से अपनी नावें हटाने का विरोध कर रहे हैं और उन्होंने अप्रैल में विरोध प्रदर्शन भी किया था। इसी माहौल के बीच जून 5 की रात दलित बस्ती के रहने वाले भूमिलिंगम की मौत हो गई।

प्रशासन ने विवादित 43 सेंट ज़मीन की माप और सीमांकन कराने का फैसला किया और मछुआरों द्वारा वहाँ खड़ी की गई नावों को हटाने का निर्देश दिया।

6 जून को रिश्तेदार और पड़ोसी अंतिम संस्कार के लिए शव को नाडुकुप्पम श्मशान ले गए। लेकिन स्थानीय मछुआरों ने विरोध किया और SC समुदाय के लोगों पर पत्थर और डंडों से हमला कर दिया।

बाद में दलित समुदाय के लोग शव को अर्थी पर रखकर कुछ सौ मीटर दूर ECR ले गए और सड़क जाम कर दी। उन्होंने हमले में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई और इस विवाद का स्थायी समाधान करने की मांग की।

मुख्य सड़क पर दो घंटे तक ट्रैफिक बाधित रहने के बाद, विल्लुपुरम रेंज के DIG ए. अरुलारासु के नेतृत्व में पुलिस और राजस्व अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। इसके बाद भीड़ हट गई और भूमिलिंगम का अंतिम संस्कार उसी श्मशान में किया गया।

9 जून को जब अधिकारी ज़मीन मापने पहुँचे, तो सैकड़ों मछुआरिनों ने बड़ा विरोध किया।

मछुआरिनों ने किया ज़बरदस्त विरोध, बोलीं- हमारी नावों के लिए भी तो जगह चाहिए

ताज़ा घटनाक्रम में सोमवार-मंगलवार को प्रशासन ने विवादित 43 सेंट ज़मीन की माप और सीमांकन कराने का फैसला किया और मछुआरों द्वारा वहाँ खड़ी की गई नावों को हटाने का निर्देश दिया । 9 जून को जब अधिकारी ज़मीन मापने पहुँचे, तो सैकड़ों मछुआरिनों ने बड़ा विरोध किया। उन्होंने अपने गले में रस्सियाँ बाँध लीं और समुद्र में उतरकर प्रदर्शन किया। 

मछुआरिनों का कहना है कि नावें हटाने से उनकी आजीविका प्रभावित होगी। पुलिस के रोकने पर मामूली झड़प भी हुई ।

बाद में पुलिस सुरक्षा के बीच राजस्व अधिकारियों ने विवादित क्षेत्र का सर्वेक्षण किया और नावों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, और इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रखा गया है ।

तमिलनाडु के सामाजिक न्याय मंत्री वन्नी अरसु ने रविवार को प्रभावितों से मुलाकात की और भूमि का निरीक्षण किया। उन्होंने स्वीकार किया कि 43 सेंट की इस श्मशान भूमि पर अतिक्रमण हुआ है। मंत्री ने इसे वापस दिलाने के लिए कदम उठाने का आश्वासन दिया।

प्रशासन ने सोमवार को जिला कलेक्ट्रेट में एक शांति सम्मेलन बुलाया, जिसमें सभी पक्षों को शामिल किया गया। इस समय क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात है और स्थिति नियंत्रण में है। हालाँकि, ज़मीन का सीमांकन और नावों को हटाने का मुद्दा संवेदनशील बना हुआ है। प्रशासन का कहना है कि दोनों समुदायों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए समाधान निकाला जाएगा ।

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