सूरज येंगड़े के नाम से विवादित लेख का स्क्रीनशॉट वायरल: बहुजन समाज आक्रोशित, द वायर ने बताया झूठा – क्या है सच्चाई?

01:11 AM Mar 29, 2026 | Geetha Sunil Pillai

नई दिल्ली- दलित विचारक और लेखक सूरज येंगड़े के नाम पर एक फर्जी लेख का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल होने से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। फर्जी स्क्रीनशॉट के जरिये येंगड़े पर 'दलित पॉर्न' के पक्ष में लेख लिखने का आरोप लगाया गया था, जिसमें अम्बेडकरवादी विचारधारा को बढ़ावा देने के लिए सवर्ण महिला और दलित सफाई कर्मचारी के बीच संबंध जैसे दृश्यों वाले पॉर्न कंटेंट बनाने की बात कही गई थी।

यह स्क्रीनशॉट 'द वायर' वेबसाइट पर प्रकाशित होने का दावा करता था, लेकिन हकीकत में ऐसा कोई लेख कभी लिखा ही नहीं गया। इस फर्जी सामग्री ने बहुजन समुदाय को निशाना बनाते हुए जातीय तनाव बढ़ाने की कोशिश की, जिससे दलित-बहुजन कार्यकर्ताओं में गुस्सा फूट पड़ा।

फर्जी लेख का शीर्षक था- “The Case for Dalit ‘Porn’ – Why Bahujan Content Creators Must Conquer this Last Frontier”। इसमें दावा किया गया था कि अम्बेडकरवादी विचारधारा को लोकप्रिय बनाने के लिए पॉर्न जैसी सबसे ज्यादा देखी जाने वाली सामग्री का सहारा लेना जरूरी है। उदाहरण के तौर पर सवर्ण महिला और दलित सफाई कर्मचारी के बीच संबंधों पर आधारित पॉर्न आइडिया दिए गए थे। यह पोस्ट तेजी से वायरल हुआ और कई लोग इसे असली मानकर आक्रोश व्यक्त करने लगे। यूट्यूबर अजीत भारती ने इस पर आधारित पूरे दो घंटे लंबा वीडियो बनाया, जिसमें येंगड़े की आलोचना की गई लेकिन बाद में जब यह फर्जी साबित हो गया, तो अजीत भारती ने अपना वीडियो डिलीट कर दिया।

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द वायर के फाउंडिंग एडिटर सिद्धार्थ वरदराजन ने तुरंत स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह फर्जी है। अपने एक्स पोस्ट में उन्होंने लिखा, “जातिवादी हिंदुत्व प्रभावित हिंदुओं में नफरत और विकृति की कोई सीमा नहीं। उन्होंने अपने बीमार दिमाग से एक फर्जी कहानी गढ़ी और उसे एक सम्मानित दलित विद्वान सूरज येंगड़े तथा द वायर पर थोपने की कोशिश की।” वरदराजन ने स्पष्ट रूप से कहा कि द वायर पर ऐसा कोई लेख कभी प्रकाशित नहीं हुआ और न ही येंगड़े ने कभी ऐसा कुछ लिखा। फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर ने भी इसकी पोल खोली। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए अजीत भारती के 2 घंटे के वीडियो का जिक्र किया और वरदराजन के जवाब को शेयर कर पुष्टि की कि यह स्क्रीनशॉट जाली है। जुबैर ने इसे राईट विंगर यूट्यूबर्स द्वारा फैलाई जा रही गलत सूचना का उदाहरण बताया।

हालाँकि वीडियो डिलीट करने के बाद अजीत ने येंगड़े की आलोचना करते हुए लिखा, "सूरज येंगड़े के 'द वायर' (The Wire) आर्टिकल के स्क्रीनशॉट को एस. वरदराजन ने 'फर्जी' बताया है। चलिए मान लेते हैं कि यह सच में फर्जी है, लेकिन येंगड़े इस बकवास का बचाव कैसे करेंगे? उनकी पूरी ज़िंदगी उन्हीं 'रेप-फैंटेसीज़' के इर्द-गिर्द घूमती है, जिन्हें वे 'बौद्धिक बातें' होने का चोला पहनाते हैं। इस मानसिकता वाले इंसान को इस तरह खुलेआम नहीं घूमना चाहिए।

हम इसी चीज़ के खिलाफ लड़ रहे हैं: दलितों को सरकार से मिली ताकत का इस्तेमाल करके ऐसी घटिया बातें लिखने और फिर भी बच निकलने की छूट मिलना। ज़रा कल्पना कीजिए कि हाइलाइट किए गए हिस्से में 'दलित' और 'ब्राह्मण' की जगहें आपस में बदल दी जाएं तो क्या होगा।"

सूरज येंगड़े ने खुद इस विवाद पर ट्विटर पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अजीत भारती पर तंज कसा और उनके वीडियो डिलीट करने को 'कायरता' बताया। येंगड़े के समर्थकों ने भी पोस्ट किया कि यह दलित विद्वानों को बदनाम करने की साजिश है।

बहुजन समुदाय में इस फर्जी पोस्ट को लेकर गहरा आक्रोश है। कई दलित-बहुजन कार्यकर्ताओं ने इसे येंगड़े जैसे प्रमुख आवाजों को चुप कराने की साजिश बताया। उनका कहना है कि फर्जी सामग्री को वायरल कर जातीय घृणा फैलाई जा रही है, जबकि असली मुद्दे जैसे आरक्षण, जातीय हिंसा और सामाजिक न्याय पर ध्यान नहीं दिया जाता। कुछ ने कहा कि येंगड़े के पिछले लेखों और पोस्ट्स को तोड़-मरोड़कर पेश किया जाता है, जिससे बहुजन समुदाय को निशाना बनाया जाता है। ऑपइंडिया जैसी वेबसाइट ने भी माना कि स्क्रीनशॉट फर्जी है, लेकिन येंगड़े के पुराने बयानों के कारण कुछ लोग इसे विश्वसनीय मान बैठे।

अब क्या है स्थिति? फर्जी लेख पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। आंबेडकर सेन्टर सहित कई बहुजन विचारकों और एक्टिविस्ट ने ग्रोक से आर्टिकल की प्रमाणिकता को लेकर सवाल किये जिसपर ग्रोक ने उक्त लेख को फर्जी बताया। एक सवाल के जवाब में ग्रोक ने लिखा- "हाँ, यह स्क्रीनशॉट फ़र्ज़ी है। 'The Wire' (या किसी भी भरोसेमंद जगह) पर "The Case for ‘Bahujan Porn’" नाम का या उस तरह के कंटेंट वाला कोई भी आर्टिकल मौजूद नहीं है। उनकी साइट, आर्काइव, सूरज येंगड़े के हाल के पब्लिकेशन (Outlook, Feb 2026 में सबसे नया), और वेब/X पर खोजने पर भी कुछ नहीं मिला। इसे जातिगत तनाव भड़काने के लिए मनगढ़ंत तरीके से बनाया गया है।"

द वायर की वेबसाइट पर ऐसा कोई लेख नहीं, और न ही येंगड़े के किसी प्रकाशन में ऐसा कुछ है। सिद्धार्थ वरदराजन, मोहम्मद जुबैर और येंगड़े के स्पष्टीकरण के बाद सोशल मीडिया पर बहस जारी है। कुछ लोग कह रहे हैं कि फर्जी सामग्री पर भरोसा करना गलत था, लेकिन येंगड़े के विचारों पर सवाल उठाने का अधिकार है। वहीं बहुजन समुदाय इसे जातिवादी षड्यंत्र मानकर विरोध कर रहा है। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि सोशल मीडिया पर फेक न्यूज कितनी आसानी से जातीय तनाव भड़का सकती है। फिलहाल येंगड़े के समर्थक इस हमले को दलित आवाजों को दबाने की कोशिश बताते रहे हैं।