MP: दलित दिव्यांग बुजुर्ग को जेल भेजने का मामला गरमाया, अनुसूचित जाति आयोग ने लिया संज्ञान

12:48 PM Mar 29, 2025 | Ankit Pachauri

भोपाल। मध्य प्रदेश के गुना जिले में जमीनी विवाद के चलते दलित दिव्यांग बुजुर्ग लक्ष्मण अहिरवार पर दर्ज हुई FIR और उनकी गिरफ्तारी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश पुलिस के एडीजीपी अनुसूचित जाति कल्याण को पत्र लिखकर कार्यवाही की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला वर्ष 2024 का है। जुलाई महीने में कैंट थाने में जालसाजी की एक FIR दर्ज की गई थी। यह शिकायत सीताराम कॉलोनी निवासी शिशुपाल रघुवंशी ने 27 जुलाई 2024 को दी थी। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि अंशुल सहगल, भानुप्रताप सिसोदिया, दीपक श्रीवास्तव सहित अन्य लोग जमीन खरीदने और बेचने का काम करते हैं।

शिशुपाल ने बताया कि 18 जनवरी 2022 को उनकी बैठक रामवीर जाटव, लक्ष्मण जाटव, जितेंद्र जाटव, बलवीर आदिवासी, लक्ष्मण सेहरिया, लखन सेहरिया और लीला बाई सहरिया से हुई थी। इस बैठक में नगर पालिका क्षेत्र की जगनपुर स्थित एक जमीन का सौदा 1.07 करोड़ रुपये में तय हुआ था। इसके तहत 46.50 लाख रुपये नगद और 5 लाख रुपये चेक के जरिए दिए गए थे, और एक एग्रीमेंट भी किया गया था।

शिशुपाल के अनुसार, एग्रीमेंट में तय हुआ था कि विक्रय अनुमति मिलने के बाद जमीन की रजिस्ट्री करा दी जाएगी, लेकिन विक्रेताओं ने ऐसा नहीं किया। बाद में पता चला कि उन्होंने दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा कर किसी अन्य व्यक्ति के साथ भी एग्रीमेंट कर लिया है। इस पर शिशुपाल ने कैंट थाने में फ्रॉड, दस्तावेजों की कूटरचना सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कराया।

इस मामले में आरोपी बनाए गए लक्ष्मण अहिरवार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। उनके बेटे राजेंद्र अहिरवार ने बताया कि उनके पिता लगभग डेढ़ महीने जेल में रहे, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ गई। जेल से बाहर आने के बाद उन्हें लकवा मार गया और उनका शरीर काम करना बंद कर दिया। पिछले कई महीनों से उनका इलाज उज्जैन के एक निजी अस्पताल में चल रहा है।

एससी संगठनों ने किया था प्रदर्शन

लक्ष्मण अहिरवार के परिवार और समाज के लोगों ने 22 फरवरी को उनके समर्थन में जयस्तंभ चौराहे से हनुमान चौराहे तक रैली निकाली। इस दौरान उन्होंने चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने लक्ष्मण अहिरवार को एक बेड पर लिटाकर गाड़ी में वहां लाया और बेड को चौराहे पर रख दिया। इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुईं।

इससे पहले 11 फरवरी को भी उनके परिवार ने जनसुनवाई में भाग लिया था और उन्हें अस्पताल के बेड पर लिटाकर जनसुनवाई स्थल पर ले गए थे।

अनुसूचित जाति आयोग ने लिया संज्ञान

15 मार्च को लक्ष्मण अहिरवार के परिवार ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग से इस मामले की शिकायत की थी। आयोग के डायरेक्टर जी सुनील कुमार बाबू ने मध्य प्रदेश पुलिस के एडीजीपी अनुसूचित जाति कल्याण को पत्र लिखकर मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द कार्रवाई करने को कहा है।

इस मामले को लेकर दलित संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में भारी रोष है। उनका कहना है कि लक्ष्मण अहिरवार पहले से ही दिव्यांग थे, फिर भी उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई कर उन्हें जेल भेज दिया गया। समाज के लोग इसे दलितों के खिलाफ अन्याय मानते हुए न्याय की मांग कर रहे हैं।