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कानपुर में इंसानियत शर्मसार: पानी की बाल्टी छूने पर दलित किशोर को निर्वस्त्र कर पीटा, जूतों पर थूक कर चटवाया

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से एक बेहद खौफनाक और शर्मनाक घटना सामने आई है। यहाँ कथित तौर पर सवर्ण जाति के चार लोगों ने पानी की बाल्टी छूने के विवाद में एक 16 वर्षीय दलित किशोर को निर्वस्त्र करके बुरी तरह पीटा।

हमलावरों की क्रूरता यहीं नहीं रुकी, उन्होंने न सिर्फ लड़के का हाथ तोड़ दिया, बल्कि उसे अपने जूतों पर थूक कर चाटने के लिए भी मजबूर किया।

कानपुर की यह अमानवीय घटना रविवार को तब सामने आई, जब इससे ठीक एक दिन पहले सोशल मीडिया पर एक और वीडियो वायरल हुआ था। इस वायरल वीडियो में चंदौली जिले के एक पिछड़े वर्ग के युवक को बंदूक की नोंक पर थूक चाटने के लिए मजबूर करते हुए देखा गया था।

Telegraph India की रिपोर्ट के अनुसार, कानपुर की यह वारदात 2 मई को झखरा सांभरपुर गांव में घटित हुई थी। रविवार को पत्रकारों से बात करते हुए पीड़ित लड़के के पिता ने बताया कि बीच-बचाव करने के दौरान हमलावरों ने उन पर भी हमला किया और उनकी पसलियां तोड़ दीं।

पेशे से किसान, पीड़ित पिता ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि उन्हें किसी ने सूचना दी थी कि उनके बेटे को कुछ लोगों ने बांध रखा है। जब वह उसे बचाने के लिए मौके पर दौड़े, तो आरोपियों ने उनकी भी जमकर पिटाई कर दी। उन्होंने बताया कि गांव के अन्य लोगों के दखल देने के बाद ही उन्हें वहां से छोड़ा गया।

पीड़ित किशोर ने बताया कि वह खेतों में काम कर रहा था और उसे बहुत तेज प्यास लगी थी। तभी उसकी नजर संजय राजपूत के घर के सामने एक सार्वजनिक हैंडपंप के पास रखी पानी से भरी एक बाल्टी पर पड़ी।

लड़के के अनुसार, जैसे ही वह वहां गया और उसने एक मग पानी निकाला, संजय, उसका भाई दीपक और उनके साथी सागर कुमार व पतिया कुमार दौड़ते हुए आए। आरोपियों ने तुरंत उसके हाथ से मग छीन लिया और करीब आधे घंटे तक उसे निर्वस्त्र कर बुरी तरह पीटते रहे।

किशोर ने आगे बताया कि जब उसके पिता उसे बचाने आए, तो उन्हें भी लात-घूंसों से पीटा गया। दोनों पिता-पुत्र लगातार माफी मांगते रहे लेकिन हमलावरों ने उन्हें पीटना बंद नहीं किया।

इसके बाद संजय ने अपने जूतों पर थूका और किशोर को उसे चाटने पर मजबूर किया। उन्होंने लड़के के जूतों में पानी भरकर उसे पीने के लिए भी विवश किया।

इस क्रूर हमले के बाद घायल पिता और पुत्र तीन दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहे। लड़के ने बताया कि दो दिन पहले ही उन्होंने किसी तरह हिम्मत जुटाकर पुलिस से संपर्क किया है।

कानपुर जिले के पनकी क्षेत्र के सहायक पुलिस आयुक्त मनोज कुमार सिंह ने इस पूरी घटना को 'कुछ लोगों के बीच हुई मारपीट' करार दिया है। उन्होंने जानकारी दी कि चार लोगों के खिलाफ एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और कार्रवाई से पहले मामले की गहन जांच की जा रही है।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों पर नजर डालें, तो दलितों के खिलाफ अत्याचार के मामलों में उत्तर प्रदेश देश भर में सबसे ऊपर है। इन आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में साल 2023 में 15,130 और 2024 में 14,642 ऐसे मामले दर्ज किए गए थे।

दूसरी ओर, चंदौली की घटना के कथित वायरल वीडियो में एक युवक को बीस साल के आसपास के एक व्यक्ति पर पिस्तौल तानते हुए स्पष्ट देखा जा सकता है। वीडियो में आरोपी जमीन पर थूकता है और पीड़ित को उसे चाटने के लिए धमकाता हुआ दिखाई देता है।

चंदौली के पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल ने पुष्टि की है कि यह घटना लगभग नौ या दस महीने पहले भगतपुर गांव में हुई थी। शनिवार को पत्रकारों को जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि जमालपुर पुलिस स्टेशन में अंशु सिंह के खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज कर लिया गया है। उसे बुलाकर माफी मंगवाई गई है और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

हालांकि, उस वीडियो में केवल एक ही हमलावर नजर आ रहा है, लेकिन पीछे से आ रही आवाजों से कम से कम दो और साथियों की मौजूदगी का पता चलता है। इनमें से एक व्यक्ति शायद वीडियो रिकॉर्ड कर रहा था।

चंदौली के पीड़ित का कहना है कि हमलावर रियल एस्टेट एजेंट और जाने-माने बदमाश हैं। पीड़ित ने आरोप लगाया कि वे तीनों उसी के गांव भगतपुर के रहने वाले हैं और उन्होंने सिर्फ मजे के लिए उस पर हमला किया था। इलाके में दहशत फैलाने के मकसद से ही उस वीडियो को इंटरनेट पर पोस्ट किया गया था।

उसने अपनी शिकायत में यह भी बताया कि पुलिस ने शनिवार को केवल अंशु को हिरासत में लिया और थोड़ी ही देर में उसे पुलिस स्टेशन से ही जमानत दे दी गई।

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