मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ में दलित महिला की हत्या के मामले में बुधवार को कलेक्ट्रेट पर न्याय की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस की कार्रवाई अब बड़े विवाद का रूप ले चुकी है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अविनाश पांडेय कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों को थप्पड़ मारते और पुलिस वैन के अंदर जाकर हिरासत में बैठे एक कार्यकर्ता रवि गौतम के साथ मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं। इन वीडियो के सामने आने के बाद बहुजन समाज, सामाजिक संगठनों, अधिवक्ताओं और विपक्षी नेताओं में भारी आक्रोश है। कई संगठनों ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा SSP के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
मेरठ पुलिस के अनुसार, 15 मई को थाना टीपी नगर क्षेत्र से एक महिला लापता हुई थी। परिजनों ने 16 मई को गुमशुदगी दर्ज कराई और 17 मई को महिला का शव थाना रोहटा क्षेत्र के एक गांव से बरामद हुआ। पुलिस ने शव की तत्काल शिनाख्त कराई और मामले की विवेचना क्षेत्राधिकारी ब्रह्मपुरी को सौंपी गई।
पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान दो अन्य व्यक्तियों की भूमिका सामने आई, जिन्होंने कथित रूप से साक्ष्य मिटाने में सहयोग किया। उनके खिलाफ भी संबंधित धाराओं में कार्रवाई की गई। पुलिस का दावा है कि विवेचना के दौरान मृतका के परिजनों से लगातार संपर्क रखा गया तथा उनके द्वारा उठाए गए सभी बिंदुओं का समाधान किया गया।
प्रेस नोट
— MEERUT POLICE (@meerutpolice) July 8, 2026
महिला की मृत्यु व अभियोग के सफल अनावरण के बाद भी प्रकरण में परिजनों को भड़काकर अवैध रूप से सड़क जाम करने, भीड़ को उकसाने एवं कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाले अभियुक्त को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया।
दिनांक 15 मई को थाना टीपीनगर क्षेत्र से एक महिला गुमशुदा हुई… pic.twitter.com/nai4LqkuZJ
परिजनों को भड़काकर कराया गया सड़क जाम- पुलिस
मेरठ पुलिस ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि जांच के बावजूद कुछ "अराजक एवं अवैधानिक तत्वों" ने मृतका के परिजनों को भड़काकर मामले को अलग स्वरूप देने का प्रयास किया। पुलिस के अनुसार, ज्ञापन देने के नाम पर बड़ी भीड़ इकट्ठा की गई और सड़क जाम कर दी गई, जिससे कानून-व्यवस्था और यातायात प्रभावित हुआ।
प्रेस नोट के मुताबिक पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने कई बार प्रदर्शनकारियों से सड़क खाली करने का अनुरोध किया, लेकिन जब जाम नहीं हटाया गया तो "कानून एवं यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक न्यूनतम बल प्रयोग" कर सड़क खुलवाई गई।
प्रेस नोट के अनुसार "प्रकरण में उपलब्ध वीडियो साक्ष्यों एवं सोशल मीडिया के विश्लेषण के आधार पर सड़क जाम लगवाने, लोगों को उकसाने तथा पूरे घटनाक्रम में सक्रिय भूमिका निभाने वाले व्यक्तियों को चिह्नित किया गया। इसी क्रम में अभियुक्त दिग्विजय सिंह पुत्र रघुराज सिंह भाटी निवासी हसनपुर, जनपद अमरोहा व अन्य चिह्नित व्यक्तियों की भूमिका की गहनता से जांच की जा रही है तथा साक्ष्यों के आधार पर उनके विरुद्ध भी आवश्यक वैधानिक कार्यवाही की जा रही है । उपरोक्त प्रकरण में चिन्हित व्यक्तियों का आपराधिक इतिहास होना भी पाया गया है।" पुलिस ने प्रकरण में रवि गौतम पुत्र सतपाल का भी शमिल होना माना है।
हालांकि प्रदर्शनकारियों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि पुलिस ने आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया और हिरासत में बैठे लोगों के साथ भी मारपीट की।
पुलिस का कहना है कि सड़क जाम और कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होने के कारण कार्रवाई की गई, जबकि प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वे न्याय की मांग कर रहे थे और उन पर अनावश्यक बल प्रयोग किया गया।
UP's Meerut SSP Avinash Pandey could be seen thrashing a person identified as Ravi Gautam inside a prisoner transport vehicle. The incident took place when the local police used mild force to disperse agitators from Dalit community who had been protesting on the road against… pic.twitter.com/KGhquSbUo8
— Piyush Rai (@Benarasiyaa) July 8, 2026
वायरल वीडियो जिससे फ़ैल रहा आक्रोश
कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया। पुलिस का कहना है कि सड़क जाम और कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होने के कारण कार्रवाई की गई, जबकि प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वे न्याय की मांग कर रहे थे और उन पर अनावश्यक बल प्रयोग किया गया।
इसी दौरान सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें SSP अविनाश पांडेय प्रदर्शनकारियों को थप्पड़ मारते दिखाई देते हैं। एक वीडियो में वह पुलिस वाहन के भीतर जाकर हिरासत में रवि गौतम नामक एक व्यक्ति को थप्पड़ मारते नजर आते हैं। कुछ वीडियो में कथित तौर पर उनकी आवाज भी सुनाई देती है, जिसमें वे प्रदर्शनकारियों को फटकारते हुए दिखाई देते हैं। इन वीडियो के वायरल होने के बाद विवाद और तेज हो गया।
नगीना सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने सोशल मीडिया पर लिखा कि दलित बेटी के लिए न्याय की आवाज उठाने वालों के साथ प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई बेहद निंदनीय है। उन्होंने कहा कि संविधान शांतिपूर्ण विरोध और न्याय मांगने का अधिकार देता है तथा उन्होंने मेरठ जाकर पीड़ित परिवार से मिलने की घोषणा भी की।
सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मण यादव ने घटना को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
लेखक और सामाजिक टिप्पणीकार सहित कई अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी वायरल वीडियो साझा करते हुए कहा कि यदि पुलिस हिरासत में बैठे व्यक्ति के साथ भी कथित मारपीट होती है तो यह कानून के शासन और संवैधानिक मूल्यों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
अधिवक्ता सुरक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष डी. बाबू एडवोकेट ने कहा कि यदि पुलिस हिरासत में बैठे व्यक्ति के साथ भी कथित मारपीट होती है, तो यह कानून के शासन, लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की भावना पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और SSP अविनाश पांडेय के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को न्याय मांगने, शांतिपूर्ण विरोध करने और अपनी बात रखने का अधिकार देता है तथा इन अधिकारों की रक्षा ही लोकतंत्र की असली पहचान है।
घटना के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में बहुजन संगठनों, दलित अधिकार कार्यकर्ताओं और अधिवक्ताओं ने वीडियो साझा करते हुए इसे सत्ता के दुरुपयोग और पुलिस की कथित ज्यादती बताया। कई पोस्टों में सवाल उठाया गया कि यदि पुलिस हिरासत में मौजूद लोगों के साथ भी ऐसा व्यवहार किया जाता है तो आम नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी।
घटना को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों ने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की है कि वायरल वीडियो की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यदि जांच में पुलिस अधिकारियों की ओर से कानून के विरुद्ध बल प्रयोग या हिरासत में मारपीट की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विधि सम्मत कार्रवाई की जाए। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई थी और पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है।