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"कंप्यूटर पर बकरे की बलि दो": महाराष्ट्र के मंत्री के बयान पर भाजपा नेता का जवाब: "अपने होटल का मटन छोड़ कागज खाकर देखो"

मुंबई- महाराष्ट्र की सियासत में बकरीद से ठीक पहले एक बार फिर मीट को लेकर विवाद गरम हो गया है। भाजपा नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितेश राणे के विवादित बयान ने पूरे राज्य में तूफान खड़ा कर दिया है। राणे ने बकरीद पर बकरे की कुर्बानी को 'वर्चुअल' तरीके से मनाने का सुझाव दिया, जिसके बाद भाजपा के ही एक नेता हाजी आराफत शेख ने उन पर तीखा पलटवार किया है।

क्या बोले थे राणा?

सोमवार को मुंबई में मीडिया से बात करते हुए नितेश राणे ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के नाम पर होली पर पानी बचाने और दिवाली पर पटाखे न फोड़ने की अपील की जाती है, तो बकरी ईद पर भी इसी तरह की अपील होनी चाहिए।

राणे ने कहा, “लोगों को सलाह दी जानी चाहिए कि वे कंप्यूटर या मोबाइल पर बकरे की तस्वीर लगाकर वर्चुअली बलि का प्रदर्शन करें।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बकरी ईद के मौके पर कई जगहों पर गाय का मांस बकरे के मांस के नाम पर बेचा जाता है, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है। राणे ने AIMIM नेता वारिस पठान को निशाना बनाते हुए कहा कि जो कोई भी 'गौ माता' पर 'गंदी नज़र' डालेगा, वह सीधे जेल जाएगा।

नितेश राणे के बयान पर भाजपा के ही मुस्लिम चेहरे और नेता हाजी आराफत शेख ने बेहद कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया दी। शेख ने नितेश राणे को उनकी खुद की पृष्ठभूमि याद दिलाते हुए कहा:

“नितेश राणे को थोड़ा समझना चाहिए। यह ईद का त्योहार है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उनके खुद का मीट शॉप है। उनके पिता नारायण राणे मीट शॉप से उठकर मंत्री बने और केंद्र में उच्च पद तक पहुंचे। चेम्बूर में उनकी मां के नाम पर होटल है, जहां बढ़िया केकड़ा, मछली और मटन मसाला बिकता है।”

शेख ने आगे कहा, “नितेश राणे, अपनी मटन की दुकान और होटल को देखिए। अगर रविवार को मटन खाते हो तो कभी कागज खाकर देखो, स्वाद समझ आएगा। लेकिन जब मैं आपके होटल जाता हूं तो खाना बहुत स्वादिष्ट होता है, खासकर मटन।”

हाजी आराफत शेख ने यह भी कहा कि वाहनों में बकरों को रोकने से हिंदू कसाई, धनगर समुदाय और मुस्लिम समुदाय तीनों परेशान हैं। उन्होंने कहा कि कसाई समुदाय को साल में सिर्फ एक बार अच्छा व्यापार करने का मौका मिलता है। शेख ने नितेश राणे को उनके पिता नारायण राणे से सलाह लेने की सलाह दी और ईद की पहले से मुबारकबाद देते हुए कहा, “मैं नितेश राणे को अपने घर पर ईद मनाने और मटन खाने के लिए आमंत्रित करता हूं।”

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने राणे के बयान की कड़ी निंदा की। पठान ने कहा: “मुसलमान सालों से बकरी ईद सभी कानूनों और दिशानिर्देशों का पालन करते हुए मना रहे हैं। संविधान का अनुच्छेद 25 हर नागरिक को अपनी धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है।”

वारिस पठान ने सवाल किया कि बकरी ईद से ठीक पहले यह मुद्दा हर साल क्यों उठाया जाता है? उन्होंने कहा कि केवल कानूनी रूप से अनुमत कुर्बानी ही की जाती है।

यह विवाद महाराष्ट्र में बकरी ईद (ईद-उल-अजहा) से कुछ दिन पहले सामने आया है। बकरी ईद मुस्लिम समुदाय का प्रमुख त्योहार है, जिसमें अल्लाह की खुशी के लिए बकरे की कुर्बानी दी जाती है। इस दौरान मांस का वितरण गरीबों और जरूरतमंदों में किया जाता है।

पिछले कई वर्षों से महाराष्ट्र सहित देश के कई राज्यों में बकरीद के दौरान मांस व्यापार, कुर्बानी और गौ-हत्या के मुद्दे पर राजनीतिक विवाद होते रहे हैं। विपक्षी दल इसे मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने की राजनीति बता रहे हैं, जबकि भाजपा इसे पर्यावरण, पशु कल्याण और कानून व्यवस्था से जोड़कर देखती है।

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