मध्य प्रदेश में जल संकट गहराया! कहीं कुओं में उतर रहीं महिलाएं, कहीं नलों से आ रहा बदबूदार पानी, जानिए क्या है स्थिति?

01:13 PM May 19, 2026 | Ankit Pachauri

भोपाल। मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी अब केवल तापमान का रिकॉर्ड नहीं तोड़ रही, बल्कि गांवों और कस्बों की पेयजल व्यवस्था की हकीकत भी उजागर कर रही है। प्रदेश के कई जिलों से ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं, जहां लोग पानी के लिए जान जोखिम में डालने को मजबूर हैं। कहीं महिलाएं गहरे कुओं में उतरकर पानी भर रही हैं, तो कहीं सूखी नदी-नालों में झिरी खोदकर मटमैला पानी निकालना पड़ रहा है। कई गांवों में नल-जल योजनाएं ठप हैं, हैंडपंप सूख चुके हैं और दूषित पानी पीने की मजबूरी से लोगों में बीमारी का डर बढ़ गया है। हालात इतने गंभीर हैं कि कई जगह ग्रामीणों का गुस्सा सड़कों पर उतर आया है और चक्काजाम तक करना पड़ा है।

सीहोर में कुएं में उतरकर पानी ला रहीं महिलाएं, सूखी नदियों में खोद रहीं झिरी

स्थानीय न्यूज रिपोर्ट्स के अनुसार सीहोर जिले की ग्राम पंचायत रामगढ़ और आसपास के ग्रामीण इलाकों में जल संकट बेहद भयावह स्थिति में पहुंच चुका है। गांव की महिलाएं रोजाना दो किलोमीटर दूर स्थित कुओं तक पहुंच रही हैं। कई कुएं इतने गहरे हैं कि महिलाओं को पत्थरों पर पैर टिकाकर नीचे उतरना पड़ता है। पानी भरते समय जरा सी चूक जानलेवा साबित हो सकती है, लेकिन प्यास बुझाने के लिए यह जोखिम उठाना उनकी मजबूरी बन गया है। कई जगहों पर तो नदी और नाले पूरी तरह सूख चुके हैं। ऐसे में ग्रामीण रेत हटाकर झिरी खोदते हैं, फिर धीरे-धीरे रिसकर आने वाले मटमैले पानी को कपड़े से छानकर घर ले जाते हैं। यह पानी पीने योग्य नहीं होने के बावजूद लोग उसी पर निर्भर हैं।

पीएचई विभाग के सहायक यंत्री अजय वर्मा के अनुसार विभाग को अब तक 345 शिकायतें मिली थीं, जिनमें से 315 का समाधान किए जाने का दावा किया गया है। हालांकि गांवों से सामने आ रही तस्वीरें बताती हैं कि जमीनी स्तर पर संकट अब भी बरकरार है और लोग राहत का इंतजार कर रहे हैं।

Trending :

रायसेन के कोकलपुर में सरकारी कुएं पर कब्जे का आरोप, 2 हजार आबादी संकट में

रायसेन जिले की बेगमगंज तहसील के कोकलपुर गांव में करीब दो हजार की आबादी जल संकट से जूझ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के सरकारी कुएं में कुछ दबंगों ने निजी मोटर पंप डाल दिए हैं, जिससे बड़ी मात्रा में पानी खींच लिया जाता है। इसके कारण पानी की टंकी तक पर्याप्त जल नहीं पहुंच पा रहा और पूरे गांव को दिनभर में महज तीन से चार कुप्पा पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि कई बार प्रशासन को शिकायत दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। गर्मी बढ़ने के साथ स्थिति और बिगड़ रही है। लोगों को सुबह से पानी भरने के लिए लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ता है और कई परिवारों को पर्याप्त पानी भी नहीं मिल पा रहा।

मंदसौर में नलों से निकल रहा कीड़े और बदबू वाला पानी, बीमारी का खतरा

मंदसौर जिले के खानपुरा गांव में समस्या पानी की कमी से आगे बढ़कर स्वास्थ्य संकट में बदलती दिखाई दे रही है। यहां बरगुंडा मोहल्ले समेत कई इलाकों में पिछले डेढ़ महीने से नलों से गंदा और बदबूदार पानी आ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक पानी में कीड़े, कचरा और दुर्गंध साफ महसूस होती है। स्थानीय महिलाओं सुगनाबाई और अनोखीबाई ने बताया कि पुरानी पाइपलाइन और जगह-जगह हुए गड्ढों के कारण गंदा पानी सप्लाई लाइन में मिल रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें यही पानी इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों में बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। इलाके के जल स्रोत भी तेजी से सूख रहे हैं। रामघाट में केवल 5 फीट और कालाभाटा में 6 फीट पानी बचा होने की जानकारी सामने आई है। लोगों ने प्रशासन से तत्काल पाइपलाइन सुधार और स्वच्छ पेयजल की मांग की है।

बैतूल के हरिमऊ गांव में 5 किलोमीटर दूर से ला रहे गंदा पानी

बैतूल जिले की भैंसदेही तहसील के हरिमऊ गांव में करीब एक हजार की आबादी बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रही है। गांव की नल-जल योजना लंबे समय से बंद पड़ी है और दो हैंडपंपों का जलस्तर भी नीचे चला गया है। इसके कारण ग्रामीणों को पांच किलोमीटर दूर स्थित एक पुराने कुएं से पानी लाना पड़ रहा है। इस कुएं के आसपास मधुमक्खियों के छत्ते लगे हैं और पानी भी साफ नहीं है, फिर भी ग्रामीण उसी को पीने और घरेलू कामों में इस्तेमाल करने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी बढ़ने के साथ हालात और गंभीर हो गए हैं। कई परिवारों का पूरा दिन केवल पानी लाने में ही निकल जाता है। महिलाओं और बच्चों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ रहा है।

बड़वानी के आदिवासी गांवों में मटमैले पानी पर निर्भर लोग

बड़वानी जिले के पाटी ब्लॉक के कई आदिवासी गांवों में भी हालात बेहद चिंताजनक हैं। ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर जाकर मटमैला पानी लाना पड़ रहा है। आदिवासी परिवारों का कहना है कि गांवों में न तो नियमित जल सप्लाई है और न ही पर्याप्त हैंडपंप काम कर रहे हैं। पहाड़ी और दूरस्थ इलाकों में बसे इन गांवों तक प्रशासनिक मदद भी समय पर नहीं पहुंच पा रही।

ग्रामीणों के अनुसार पानी की तलाश में रोज कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। गर्मी और जल संकट के कारण खेती-बाड़ी और पशुपालन पर भी असर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से टैंकर और स्थायी पेयजल व्यवस्था की मांग की है।

खरगोन में पानी के लिए चक्काजाम, विधायक के गृह ग्राम में फूटा गुस्सा

खरगोन जिले के टेमला गांव में जल संकट को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दिया। यह गांव क्षेत्रीय विधायक बालकृष्ण पाटीदार का गृह ग्राम भी है। यहां ग्रामीणों ने पानी की समस्या से परेशान होकर चक्काजाम कर दिया। लोगों का कहना है कि गांव में तीन दिन में केवल एक घंटे पानी मिल रहा है और मोटर जल जाने के कारण सप्लाई पूरी तरह प्रभावित हो गई है।

नया नगर इलाके में कई दिनों से नलों में पानी नहीं आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा कि भीषण गर्मी में पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी केवल आश्वासन दे रहे हैं।

बढ़ती गर्मी के बीच गहराता जल संकट, सरकार की योजनाओं पर उठे सवाल

प्रदेश के अलग-अलग जिलों से सामने आ रही तस्वीरें यह संकेत दे रही हैं कि जल संकट अब केवल मौसमी समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक तैयारी और जल प्रबंधन की गंभीर चुनौती बन चुका है। एक ओर सरकार नल-जल योजनाओं और हर घर जल पहुंचाने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर गांवों में लोग दूषित पानी पीने, सूखी नदियों में झिरी खोदने और कुओं में उतरने को मजबूर हैं।