मणिपुर हिंसा की जांच कर रहे आयोग का कार्यकाल बढ़ा, अब नवंबर 2026 तक सौंपनी होगी रिपोर्ट

04:17 PM May 15, 2026 | Rajan Chaudhary

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने मणिपुर में साल 2023 में भड़की जातीय हिंसा की जांच के लिए गठित जांच आयोग को छह महीने का एक और सेवा विस्तार दिया है। सरकारी अधिसूचना के अनुसार, अब यह समिति अपनी विस्तृत रिपोर्ट 20 नवंबर 2026 तक केंद्र को सौंपेगी।

14 मई 2026 को आधिकारिक गजट में प्रकाशित जानकारी के मुताबिक, आयोग को निर्देश दिया गया है कि वह अपनी जांच रिपोर्ट जल्द से जल्द प्रस्तुत करे, लेकिन इसकी अंतिम सीमा 20 नवंबर 2026 से आगे नहीं होगी। इससे पहले समिति को 20 मई तक अपनी रिपोर्ट देनी थी।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बलबीर सिंह चौहान वर्तमान में इस तीन सदस्यीय जांच पैनल का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने इसी साल 1 मार्च को कार्यभार संभाला था। उनसे पहले गुवाहाटी उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश अजय लांबा इस समिति के अध्यक्ष थे, जिन्होंने 28 फरवरी को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

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जांच आयोग का गठन जून 2023 में पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में हुई भीषण हिंसा के कारणों और तथ्यों की पड़ताल के लिए किया गया था। इस जातीय संघर्ष में अब तक 260 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और हजारों की संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं।

जांच का मुख्य केंद्र 3 मई 2023 को पहाड़ी जिलों में आयोजित 'ट्राइबल सॉलिडेरिटी मार्च' के बाद शुरू हुई घटनाओं का सिलसिला है। यह विरोध प्रदर्शन मैतेई समुदाय द्वारा अनुसूचित जनजाति (ST) के दर्जे की मांग के खिलाफ आयोजित किया गया था, जिसने बाद में हिंसक रूप ले लिया।

पैनल इस बात की भी गहनता से जांच कर रहा है कि क्या हिंसा के दौरान किसी अधिकारी या जिम्मेदार व्यक्ति की ओर से कर्तव्य में लापरवाही हुई थी। इसके अलावा, दंगों को रोकने के लिए प्रशासन द्वारा उठाए गए प्रशासनिक कदमों की पर्याप्तता का भी बारीकी से आकलन किया जा रहा है।

यह आयोग किसी भी व्यक्ति या संगठन द्वारा दी गई शिकायतों और आरोपों पर भी विचार कर रहा है। केंद्र सरकार ने मणिपुर सरकार की सिफारिश पर इस जन महत्व के मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए इस उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया था।

आयोग को अब तक कुल पांच बार सेवा विस्तार मिल चुका है। इससे पहले सितंबर 2024, दिसंबर 2024, मई 2025 और दिसंबर 2025 में भी समिति का कार्यकाल बढ़ाया गया था। गृह मंत्रालय की पिछली अधिसूचना के अनुसार, दंगों में भारी आगजनी के कारण लोगों के घर और संपत्तियां जलकर खाक हो गई थीं।