IAS संतोष वर्मा विवाद: सांसद ने उठाए चयन व प्रमोशन पर सवाल, करणी सेना नेता की हिंसक पोस्ट ने बढ़ाया तनाव!

11:40 AM Nov 29, 2025 | Ankit Pachauri

भोपाल। मध्य प्रदेश के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और अजाक्स के नव-चुने प्रांताध्यक्ष संतोष वर्मा का विवाद गहराता जा रहा है। प्रांतीय अधिवेशन में ब्राह्मण समाज को लेकर दिए गए उनके बयान के बाद जहां राज्य सरकार ने नोटिस जारी कर सात दिन में जवाब मांगा है, वहीं अब यह मामला राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया है। रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा ने न सिर्फ वर्मा के प्रमोशन पर सवाल उठाए हैं, बल्कि केंद्रीय राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर पूरी चयन प्रक्रिया की जांच कराने की मांग भी की है।

उधर करणी सेना के युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष ओकेंद्र राणा ने सोशल मीडिया पर वर्मा के खिलाफ हिंसा को भड़काने वाली आपत्तिजनक पोस्ट डालकर विवाद को और भड़का दिया। राणा ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा, “यह जहां भी मिले, इस पर गाड़ी के चारों टायर चढ़ा दो। कुचलकर आमलेट बना दो इसकी।” इस तरह की टिप्पणी ने कानून-व्यवस्था और सामाजिक तनाव को लेकर गंभीर चिंताएँ पैदा कर दी हैं।

सांसद जनार्दन मिश्रा का पत्र: चयन पर उठाए तीन बड़े सवाल

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28 नवंबर 2025 को लिखे गए पत्र में सांसद मिश्रा ने केंद्र सरकार को तीन प्रमुख बिंदुओं पर जांच करने की मांग की है-

विवादित टिप्पणी को लेकर अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

वर्मा के चयन में अनुसूचित जाति की जगह अनुसूचित जनजाति वर्ग का उपयोग किए जाने की जांच की जाए।

न्यायालय द्वारा चयन प्रक्रिया में पाई गई खामियों और पूर्व में दोषी ठहराए जाने को ध्यान में रखते हुए प्रमोशन की समीक्षा की जाए।

सांसद ने यह भी दावा किया कि देश की प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा में वर्मा का चयन नियम विरुद्ध प्रक्रिया से हुआ। मिश्रा के अनुसार, 2021 में अदालत ने उनके प्रमाणीकरण को गलत ठहराया था और आदेश दिया था कि वर्मा को पद और वेतन लाभ से वंचित किया जाए। पत्र में लिखा गया है कि उनके खिलाफ अदालत की अवमानना, सरकारी कार्य में बाधा डालने और अमर्यादित भाषा का उपयोग करने जैसे गंभीर आरोप भी रहे हैं।

सांसद ने कार्मिक मंत्री को लिखा पत्र

समानता और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बताया बयान

सांसद मिश्रा ने अपने पत्र में कहा कि वर्मा का बयान न केवल एक समुदाय के प्रति अपमान है, बल्कि संविधान में निहित समानता के अधिकार का भी उल्लंघन करता है। केंद्र सरकार जहां सामाजिक समरसता और जातीय कल्याण की योजनाओं को बढ़ा रही है, वहीं एक उच्च पदस्थ अधिकारी द्वारा ऐसा विवादित बयान देना “संवेदनशीलता और प्रशासनिक नैतिकता के विरुद्ध” है।

अजाक्स ने सौंपे ज्ञापन, कार्यवाही को बताया मनमाना

मध्य प्रदेश अजाक्स संघ के अध्यक्ष संतोष वर्मा (IAS) के विरुद्ध की गई कार्यवाही को मनमानी बताते हुए शुक्रवार को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर ज्ञापन सौंपे। संघ ने मुख्यमंत्री, राज्यपाल, मुख्य सचिव और डीजीपी को संबोधित ज्ञापन में कहा कि 23 नवंबर को अजाक्स के प्रांतीय अधिवेशन में वर्मा द्वारा सामाजिक समरसता, जातिवाद उन्मूलन और संविधान मूल्यों पर दिया गया 27 मिनट का उद्बोधन जातीय एकता को बढ़ावा देने वाला था, जिसे कुछ तत्वों ने 7 सेकंड की वीडियो क्लिप बनाकर तोड़-मरोड़कर पेश किया है। संघ ने इसे वरिष्ठ आदिवासी IAS अधिकारी की गरिमा पर प्रहार और संविधान की भावना के विपरीत बताया।

अजाक्स ने सरकार द्वारा बिना निष्पक्ष जांच के वर्मा को जारी कारण बताओ नोटिस पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे SC/ST अधिकारियों के प्रति असंवेदनशीलता का संकेत बताया। संघ ने यह भी आरोप लगाया कि ग्वालियर के MITS कॉलेज के कर्मचारी मुकेश मौर्य और भोपाल के सुधीर नायक समाज में जातीय वैमनस्य फैलाने, अफवाहें गढ़ने और अजाक्स संगठन की छवि धूमिल करने में शामिल हैं। संघ ने मांग की कि इन व्यक्तियों पर SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाए, साथ ही एक स्वतंत्र समिति गठित कर प्रकरण की जांच सुनिश्चित की जाए।

अजाक्स नेताओं ने कहा कि वर्मा एक आदिवासी क्षेत्र से आते हैं, जहाँ विवाह और सामाजिक रिवाज़ों के लिए प्रयुक्त स्थानीय शब्द अलग होते हैं। इसी क्षेत्रीय बोली का गलत अर्थ निकालकर उनकी बात को भ्रामक रूप से फैलाया गया है, जबकि राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले महापुरुष, डॉ. भीमराव अंबेडकर, मोहन भागवत और उमा भारती भी सामाजिक समरसता के लिए अंतरजातीय विवाह को आवश्यक बताते रहे हैं। संघ ने नोटिस वापसी, भ्रामक प्रचार करने वालों पर कार्रवाई और “अनुलोम-विलोम विवाह योजना” को और सशक्त करने की मांग की है।

अजाक्स के प्रवक्ता विजय शंकर श्रवण ने द मूकनायक से बातचीत में कहा कि प्रांताध्यक्ष संतोष वर्मा (IAS) का पूरा भाषण सामाजिक समरसता, जाति उन्मूलन और संविधान की मूल भावना को मजबूत करने वाला था, लेकिन कुछ तत्वों ने 7 सेकंड की क्लिप काटकर इसे भ्रामक रूप में प्रस्तुत किया है।

उन्होंने कहा, "वर्मा आदिवासी क्षेत्र से आते हैं, जहाँ विवाह और रिश्तों के लिए प्रयुक्त शब्द सामान्य बोलचाल से अलग होते हैं। उसी क्षेत्रीय बोलियों और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को तोड़कर यह प्रचारित किया जा रहा है कि उन्होंने विवादित बयान दिया, जबकि वास्तविकता इसके बिल्कुल उलट है- उन्होंने रोटी-बेटी संबंधों के माध्यम से सामाजिक दूरी कम करने और जातिवाद मिटाने की बात कही थी।"

विजय शंकर श्रवण ने आरोप लगाया कि कुछ दलित-आदिवासी विरोधी मानसिकता वाले लोग जानबूझकर गलतफहमी फैलाकर एक आदिवासी वरिष्ठ IAS अधिकारी की छवि खराब करने में लगे हैं। उन्होंने कहा, "हमने सरकार से मांग की है कि कारण बताओ नोटिस को तत्काल वापस लिया जाए और भ्रामक अफवाह फैलाने वाले व्यक्तियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए यह अत्यंत आवश्यक है।"

डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल की कड़ी प्रतिक्रिया

मध्य प्रदेश सरकार के डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए एक्स पर लिखा- “एक आईएएस अधिकारी द्वारा बहन-बेटियों को लेकर की गई टिप्पणी अत्यंत आपत्तिजनक और समाज में अनावश्यक विभाजन पैदा करने वाली है। यह विकृत मानसिकता का द्योतक है तथा प्रशासनिक गरिमा पर प्रश्न खड़े करती है।” सरकार की यह टिप्पणी स्पष्ट संकेत देती है कि विवाद को सरकार बेहद गंभीरता से ले रही है।

सरकार का नोटिस: 7 दिन में जवाब, अन्यथा एकपक्षीय कार्रवाई

राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने 27 नवंबर की देर रात संतोष वर्मा को नोटिस जारी कर 7 दिन में जवाब देने का निर्देश दिया है। नोटिस में कहा गया है, जिसमें 23 नवंबर को अजाक्स के प्रांतीय अधिवेशन में दिया गया बयान, अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1967 का उल्लंघन बताया है। जिसपर संतोषजनक जवाब न मिलने पर कार्रवाई हो सकती है। नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय में जवाब नहीं दिया गया, तो सरकार एकपक्षीय कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र होगी।

विवाद की शुरुआत कहां से हुई?

23 नवंबर को भोपाल के अंबेडकर मैदान में आयोजित अजाक्स के प्रांतीय अधिवेशन में संतोष वर्मा को प्रांताध्यक्ष चुना गया था। इसी कार्यक्रम में उन्होंने कहा था- “एक परिवार में एक व्यक्ति को आरक्षण तब तक मिलना चाहिए, जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान नहीं देता या उससे संबंध नहीं बनता।”

यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों में भारी विरोध शुरू हो गया। जातीय तनाव और प्रशासनिक नैतिकता को लेकर सवाल उठने लगे।

स्थिति अब किस ओर जा रही है?

सांसद ने चयन प्रक्रिया तक सवालों को पहुँचा कर विवाद को केंद्र स्तर पर उठा दिया है। करणी सेना नेता द्वारा दी गई हिंसक धमकी ने कानून-व्यवस्था पर नया खतरा पैदा किया है। राज्य सरकार द्वारा नोटिस जारी होने के बाद अगले सात दिन बेहद अहम होंगे। मामला यदि केंद्र और राज्य दोनों स्तरों तक जांच तक पहुँचता है, तो यह संतोष वर्मा के प्रशासनिक करियर पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।