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" मैं भूत बन कर वापस आऊँगा": विपक्ष के सभी बड़े नेता जंतर-मंतर आए, बॉलीवुड भी कर रहा अपील लेकिन 20 दिन से अनशन कर रहे सोनम वांगचुक की जिद बरकरार!

नई दिल्ली- शिक्षाविद् और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन अनशन शुक्रवार को 20वें दिन में प्रवेश कर गया। लगातार गिरती सेहत, 9 किलोग्राम से अधिक वजन कम होने और डॉक्टरों द्वारा स्वास्थ्य को "गंभीर चरण" में पहुंचने की चेतावनी के बावजूद केंद्र सरकार की ओर से अब तक कोई औपचारिक वार्ता शुरू नहीं हुई है। इसी बीच जंतर-मंतर पर वांगचुक से मिलने वाले राजनीतिक नेताओं की सूची लगातार लंबी होती जा रही है। समाजवादी पार्टी, भीम आर्मी, वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA), आम आदमी पार्टी और कांग्रेस समेत विपक्ष की लगभग सभी प्रमुख पार्टियों के वरिष्ठ नेता उनसे मुलाकात कर चुके हैं और सरकार से संवाद शुरू करने की मांग कर रहे हैं। इधर, दिग्गज नेताओं और प्रमुख लोगों की लगातार अपील के बावजूद सोनम वांगचुक अपनी जिद छोड़ने को राजी नहीं हैं। शुक्रवार को अपने समर्थकों को जारी एक सन्देश में सोनम ने कहा, " "मैं किसी भी हालत में 20 July तक ज़िंदा रहूँगा ताकि मैं आप सब के साथ संसद तक मार्च कर सकूँऔर अगर हमारा मार्च सफल नहीं रहा तो फिर मैं भूत बन कर वापस आऊँगा!”

शुक्रवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा जंतर-मंतर पहुंचे। उन्होंने वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील करते हुए कहा कि किसी उद्देश्य के लिए अपनी जान जोखिम में डालना समाधान नहीं हो सकता, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को तुरंत बातचीत शुरू करनी चाहिए और आंदोलनकारियों की बात सुननी चाहिए।

इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के.सी. वेणुगोपाल, राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल और राजस्थान के वरिष्ठ कांग्रेस नेता सचिन पायलट भी वागचुक को अपना समर्थन जाहिर कर चुके हैं। इन नेताओं ने अलग-अलग अवसरों पर वांगचुक के स्वास्थ्य पर चिंता जताते हुए कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए और केंद्र सरकार को संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए।

छतीसगढ़ के पूर्व डिप्टी सीएम टी.एस सिंहदेव ने सोनम से अनशन छोड़ने की अपील करते हुए कहा, " आपकी पूरी ज़िंदगी की सेवा ने लाखों लोगों को प्रेरित किया है और अब आपका संदेश पूरे देश तक पहुँच गया है।जो लोग सत्ता में हैं, वे बहरे नहीं हैं - वे सुनना नहीं चाहते। इस लड़ाई के लिए आपकी हिम्मत और पूरी ताकत के साथ आपकी मौजूदगी की ज़रूरत है - आपके दुख की नहीं। मैं आपसे दिल से गुज़ारिश करता हूँ कि इस अनिश्चितकालीन उपवास को खत्म करें।"

इसके अलावा, कांग्रेस नेता शशि थरूर सहित अन्य दलों के नेताओं ने पत्र और सोशल मीडिया के जरिए अपना समर्थन जताया है। बीते दिनों समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सोनम से अनशन समाप्त करने की अपील की।

गुरुवार को वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर ने वांगचुक से मुलाकात की। उन्होंने आंदोलन के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार का दायित्व है कि वह शांतिपूर्ण आंदोलनकारियों से बातचीत करे। इससे पहले समाजवादी पार्टी का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी जंतर-मंतर पहुंचकर वांगचुक के समर्थन में खड़ा हुआ था। शुक्रवार को सपा सांसद डिंपल यादव, धर्मेन्द्र यादव सहित बड़े नेताओं ने भी वांगचुक से मुलाकात कर केंद्र सरकार से तत्काल संवाद शुरू करने की अपील की।

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, आतिशी भी जंतर-मंतर जाकर वांगचुक से मिले और उनकी सेहत पर चिंता जताई। वहीं जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी सार्वजनिक रूप से कहा कि अन्ना हजारे के आंदोलन के दौरान तत्कालीन सरकार बातचीत करती थी, लेकिन मौजूदा सरकार सोनम वांगचुक के मामले में चुप दिखाई दे रही है।

भीम आर्मी चीफ और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद भी सोनम से मिलकर युवाओं को अपना सपोर्ट जाहिर कर चुके हैं। टीएमसी (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा, केरल से राज्यसभा सांसद (CPI(M) जॉन ब्रितास, पोलित ब्यूरो की सदस्य वृंदा करात और सुभाषिनी अली जैसे दिग्गज नेता भी जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक से मुलाकात कर चुके हैं।

इससे पहले राजनीतिक समर्थन के साथ-साथ फिल्म जगत से भी आवाजें उठने लगी हैं। अभिनेता अतुल कुलकर्णी ने वांगचुक के समर्थन में एक दिन का सांकेतिक उपवास रखने की घोषणा की और केंद्र सरकार से बातचीत शुरू करने की अपील की। शबाना आज़मी, अभय देओल, ज़ीनत अमान, अनुराग कश्यप, सायाजी शिंदे, सोनाक्षी सिन्हा, स्वरा भास्कर और ओमी वैद्य जैसी हस्तियों ने भी भूख हड़ताल के दौरान वांगचुक को अपना समर्थन दिया है।

क्या कह रहे हैं वांगचुक?

वांगचुक लगातार यह कह रहे हैं कि लोग उनसे अनशन समाप्त करने की अपील करने के बजाय 20 जुलाई को प्रस्तावित "चलो संसद" मार्च में शामिल हों। उनका कहना है कि बिना किसी सरकारी आश्वासन के अनशन तोड़ना गलत संदेश देगा। उन्होंने यह भी कहा कि वह शारीरिक रूप से कमजोर जरूर हैं, लेकिन उनका संकल्प कमजोर नहीं हुआ है।

डॉक्टरों के अनुसार वांगचुक का वजन अनशन शुरू होने के बाद से 9 किलोग्राम से अधिक घट चुका है। स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जा रही है और चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि लंबा उपवास अब गंभीर चिकित्सकीय जोखिम पैदा कर सकता है। इसी बीच दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी प्रशासन को निर्देश दिया है कि यदि चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उनकी स्थिति और बिगड़ती है तो आवश्यक कदम उठाए जाएं।

इस पूरे घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक पहलू यह भी है कि आंदोलन के आयोजकों का दावा है कि उन्होंने जंतर-मंतर पर विपक्ष की लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक धाराओं के नेताओं को एक मंच पर लाने में सफलता हासिल की है। अलग-अलग वैचारिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं की मौजूदगी यह संकेत देती है कि वांगचुक की सेहत और आंदोलन को लेकर राजनीतिक तथा नागरिक समाज में व्यापक चिंता मौजूद है। इसके बावजूद केंद्र सरकार की ओर से अब तक किसी औपचारिक वार्ता या सार्वजनिक प्रतिक्रिया का अभाव विपक्ष के निशाने पर है।

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