ज्योतिबा फुले परिनिर्वाण दिवस पर स्वामी आनंद स्वरूप की आपत्तिजनक पोस्ट से बहुजन समाज आक्रोशित, जानिये पूरा मामला

02:30 PM Nov 30, 2025 | Geetha Sunil Pillai

नई दिल्ली- महात्मा ज्योतिबा फुले के परिनिर्वाण दिवस 28 नवंबर पर स्वामी आनंद स्वरूप द्वारा की गई एक सोशल मीडिया पोस्ट ने बहुजन समाज में व्यापक आक्रोश पैदा कर दिया है। स्वामी आनंद स्वरूप ने अपनी पोस्ट में ज्योतिबा फुले पर निशाना साधते हुए लिखा, "भारत में हिंदू धर्म द्रोह की शुरुआत ज्योतिबाफुले ने किया था, जिसके कारण उसका अपना समाज ही बहिष्कृत कर दिया था, फिर उसका सम्मान क्या करना? जो राम का नहीं वो किसी काम का नहीं। ज्योतिबाफुले मुर्दाबाद। मनुवाद जिन्दावाद।" इस पोस्ट ने बहुजन समुदायों में तीव्र प्रतिक्रिया उत्पन्न की, जिसे ज्योतिबा फुले के योगदानों का अपमान माना जा रहा है।

इस पोस्ट के खिलाफ बहुजन कार्यकर्ता और आरजेडी प्रवक्ता प्रियंका भारती ने तीखा प्रहार किया। प्रियंका ने सोशल मीडिया पर लिखा, "महात्मा ज्योतिबा ने किसके खिलाफ द्रोह किया? परंपराओं के खिलाफ। परंपरा- छूत-अछूत की। परंपरा- विधवा महिलाओं का मुंडन कर देने की। परंपरा- बच्चियों को अशिक्षित रखने की। परंपरा- अंतर्जातीय विवाह की। परंपरा- वंचितों को शिक्षा से दूर रखने की। परंपरा- महिलाओं को इंसान ना मानने की। परंपरा- सति प्रथा की।"

उन्होंने आगे कहा, "अगर इनका विरोध ना किया होता तो कोई महिला जल रही होती, किसी का मुंडन हो रहा होता, आधी से ज्यादा आबादी अशिक्षित होती और आज भी धर्म के नाम पर कुरीतियां बढ़ रही होतीं। ज्योतिबा ने ज्ञान की ज्योति जलाई इसलिए अमर हैं। नफरती अज्ञानी को ना कोई जानता था ना जानेगा।"

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नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने इस मुद्दे को और गंभीरता से उठाते हुए मध्य प्रदेश सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। आजाद ने कहा, "बाबा साहेब अंबेडकर जी के गुरू, महान विचारक, लेखक, सत्यशोधक समाज के संस्थापक, क्रांतिसूर्य राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले जी ने जीवनपर्यंत जाति-व्यवस्था की दमनकारी जंजीरों को तोड़ने, शिक्षा को सर्वसुलभ बनाने और माताओं-बहनों को सम्मान व अधिकार दिलाने के लिए जो संघर्ष किया, तथा सामाजिक अन्याय के विरुद्ध अपने विचारों की मशाल से जो नया रास्ता दिखाया—वह आज भी हमारे आंदोलन और सत्य की लड़ाई का प्रकाशस्तंभ है।

ऐसे महान मानवतावादी महापुरुष के परिनिर्वाण दिवस पर उनके बारे में तथाकथित ‘बाबा’ और घोषित पाखंडी आनंद स्वरूप द्वारा की गई अमर्यादित और मानसिक दिवालियापन दर्शाने वाली टिप्पणी न केवल अत्यंत निंदनीय है, बल्कि यह बहुजन समाज की सामूहिक अस्मिता, सम्मान और हमारे ऐतिहासिक संघर्षों का खुला अपमान है।यह बयान उनकी संकुचित मानसिकता, महिलाओं–बहुजनों के प्रति घृणा, और उनके अंदर बैठे महापुरुषों के प्रति भय, नफरत व जातिवादी विष का प्रमाण है। हम इसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे।"

उन्होंने स्वामी आनंद स्वरूप की टिप्पणी को "अमर्यादित और मानसिक दिवालियापन दर्शाने वाली" बताते हुए कहा कि यह न केवल निंदनीय है, बल्कि बहुजन समाज की सामूहिक अस्मिता, सम्मान और ऐतिहासिक संघर्षों का खुला अपमान है। आजाद ने इसे "संकुचित मानसिकता, महिलाओं-बहुजनों के प्रति घृणा, और महापुरुषों के प्रति भय, नफरत व जातिवादी विष" का प्रमाण करार दिया और स्पष्ट कहा, "हम इसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे।"

चंद्रशेखर आजाद ने इस घटना को जबलपुर में बहुजन कुशवाहा समाज पर हुए जातिवादी हमले से जोड़ते हुए चेतावनी दी। उन्होंने बताया कि जबलपुर में बहुजन कुशवाहा समाज के लोगों पर जातिवादी गुंडों द्वारा किया गया सुनियोजित हमला इस बात का गंभीर संकेत है कि कुछ तत्व जातिवाद और सामाजिक भेदभाव की आग को व्यवस्थित रूप से भड़काने में लगे हुए हैं। आजाद ने इसे "किसी एक समाज पर नहीं—बल्कि पूरे बहुजन समाज की एकता, अस्तित्व और गरिमा पर सीधा प्रहार" बताया और कहा, "हम अपने कुशवाहा भाइयों के साथ एकजुट होकर खड़े हैं।"

मध्य प्रदेश सरकार से चंद्रशेखर आजाद ने चार सूत्री मांगें रखीं। पहली, आनंद स्वरूप पर अविलंब कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि समाज में नफरत और महापुरुषों के अपमान का जहर फैलाने वालों को स्पष्ट और कड़ा संदेश मिले। दूसरी, जबलपुर हमले में शामिल सभी हमलावरों की तत्काल गिरफ्तारी की जाए तथा उन पर कठोर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। तीसरी, पीड़ित परिवारों को सरकारी सुरक्षा, पर्याप्त मुआवजा और त्वरित न्यायिक सहायता प्रदान की जाए। चौथी, प्रशासन ऐसे संगठित जातीय अपराधों पर कठोर नियंत्रण स्थापित करे और लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तत्काल तय की जाए।

उधर, स्वामी आनंद स्वरूप के बयान से क्षुब्ध समुदाय जनों ने एसपी कार्यालय के बहार प्रदर्शन किया और स्वामी पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की, इस पर स्वामी आनंद स्वरुप ने एक और पोस्ट शेयर की जिसमे उन्होंने लिखा, " यदि मनुवाद मुर्दावाद है तो फूलेवाद मुर्दावाद अम्बेडकरवाद मुर्दावाद रहेगा । एसपी के सामने मनुवाद मुर्दावाद का नारा लग रहा है.. शर्म आनी चाहिए प्रशासन को ये गुंडे सरेआम मुर्दावाद कह रहे हैं और पुलिस रोक नहीं रही है । पुलिस यदि मेरे ऊपर कार्यवाही करती है फूलेवाद मुर्दावाद के लिए तो इन गुंडों के ऊपर भी मनुवाद मुर्दावाद के लिए कार्यवाही करें । तीन संगठन मिलकर 50 इकट्ठा हुवे इससे ज़्यादा फूले को मानने वाले हैं भी नहीं । कोई सनातनी व्यक्ति फूले और अंबेडकर को स्वीकार नहीं करेगा चाहे वो किसी जाति और वर्ण का हो ।"

कौन हैं स्वामी आनंद स्वरूप महाराज

स्वामी आनंद स्वरूप महाराज एक प्रमुख हिंदू धार्मिक नेता हैं, जो शंभवी पीठ के पीठाधीश्वर के रूप में जाने जाते हैं। वे शंकराचार्य परिषद के अध्यक्ष तथा काली सेना के संस्थापक हैं, उनकी कुछ विवादास्पद टिप्पणियां जैसे डॉ. बी.आर. अंबेडकर पर अपमानजनक बयान, के कारण कानूनी कार्रवाई का सामना भी कर चुके हैं। बेंगलुरु में स्थित उनके आश्रम में वे अधिकांश समय व्यतीत करते हैं। संविधान को लेकर उन्होंने कहा कि इसके निर्माण में सर बीएन राव का मुख्य योगदान है और उन्होंने '1935 का इंडिया एक्ट' लिखा था। आनंद स्वरूप महाराज ने मुसलमानों के प्रति विवादास्पद बयान दिए हैं और 'भूमि जिहाद' जैसे साजिश सिद्धांतों का प्रचार किया है।