नई दिल्ली- नई दिल्ली के दो पुराने सरकारी बंगले आजकल चर्चा में हैं – 1, हार्डिंग एवेन्यू और 22, पृथ्वीराज रोड के ये आवास डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन के दो अहम अध्यायों के साक्षी रहे हैं। अब इन्हें राष्ट्रीय स्मृति स्थल बनाने की मांग जोर पकड़ रही है। होर्डिंग एवेन्यू में कानून मंत्री के रूप में रहे एवं 22. पृथ्वीराज रोड, में राज्यसभा सांसद के रूप में निवास किया.
14 अप्रैल को बाबा साहब की जयंती के मद्देनजर भारतीय संविधान के शिल्पकार के सम्मान में उनके पूर्व सरकारी आवासों को राष्ट्रीय स्मृति स्थल (Memorial) में बदलने की मांग को लेकर डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर नेशनल एसोसिएशन ऑफ इंजीनियर्स (BANAE), राजस्थान के सदस्य बी.एल. भाटी ने केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत को एक विस्तृत प्रस्ताव भेजा है।
प्रथम नेहरू मंत्रालय में कानून मंत्री के रूप में , अंबेडकर भारत की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आधिकारिक निवासों में रहते थे, पहले 22 पृथ्वीराज रोड और फिर 1 हार्डिंग एवेन्यू। सितंबर 1951 में, हिंदू कोड बिल पर गतिरोध के बाद उन्होंने कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया । इसके बाद, वह और उनकी पत्नी सविता 26 अलीपुर रोड चले गए, जो सिरोही के पूर्व शासक से किराए पर लिया गया 10 कमरों वाला बंगला था ।
अंबेडकर के सहायक नानक चंद रत्तू हर शाम अलीपुर रोड पर आते थे और 1951-1956 के दौरान वहां उनकी कई रचनाएँ टाइप कीं। अंबेडकर की मृत्यु 6 दिसंबर 1956 को बंगले में हुई। सविता अंबेडकर वहीं रहती रहीं और अंबेडकर के कागजात एक स्टोररूम में रखे रहे। 1966 में मदन लाल जैन ने बंगला खरीदा: उन्होंने सविता अंबेडकर को दो कमरे रखने की अनुमति दी, इमारत का एक हिस्सा अपने दामाद को दे दिया और दूसरा हिस्सा अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश को किराए पर दे दिया।
प्रस्ताव के मुख्य बिंदु:
बी.एल. भाटी ने अपने पत्र में लिखा कि ये आवास बाबा साहब के जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों के साक्षी रहे हैं। इन्हें स्मृति स्थल बनाकर उनकी स्मृति को जीवित रखा जा सकता है।
शिक्षा और जागरूकता इन स्थानों को संग्रहालय, पुस्तकालय या शोध केन्द्र के रूप में विकसित कर लोगों को उनके विचारों, राधर्षों और संविधान निर्माण में योगदान के बारे में जानकारी दी जा सकती है। सामाजिक समानता का प्रतीक यह कदम उनके द्वारा समाज में समता और न्याय के लिए किए गये प्रयासों को रेखांकित करेगा।
पत्र में सुझाव दिया गया कि होर्डिंग एवेन्यू को डॉ बी.आर अम्बेडकर संविधान स्मृति संग्रहालय के रूप में विकसित किया जाए। यहाँ पर ये हो:
ⅰ. संविधान निर्माण से संबंधित दस्तावेजों और प्रारूप समिति के कार्यों की प्रदर्शनी
ii. उनके कानून मंत्री के कार्यकाल से जुड़े पत्राचार और नीतियों का प्रदर्शन
iii. एक ऑडियो-विजुअल कक्ष जिसमें उनके भाषणों और जीवन की झलकियां दिखाई जाएँ।
iv. सुविधाएँ-पुस्ताकलय, शोध केन्द्र और आगन्तुकों के लिए बैठने व्यवस्था।
इसी तरह 22, पृथ्वीराज रोड़ के आवास को डॉ बी आर अंबेडकर सामाजिक न्याय स्मृति स्थल के रूप में विकसित किया जाए। जहां उनके व्यक्तिगत जीवन लेखन, और बौद्ध धर्म अपनाने से जुड़े दस्तावेजों का प्रदर्शन हो, सामाजिक सुधार और दलित उत्थान के लिए उनके कार्यों पर प्रकाश डालती प्रदर्शनी और एक ध्यान कक्ष जो उनके बौद्ध दर्शन को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाए।
पत्र में सुझाया गया कि इन स्मृति स्थलों का प्रबंधन सरकृति मंत्रालय या शहरी विकास मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त निकाय द्वारा किया जाए। रखरखाव के संचालन के लिए बार्षिक बजट आवंटन की व्यवस्था हो। जनता के लिए निःशुल्क या न्यूनतम शुल्क पर प्रवेश सुनिश्चित किया जाए।
प्रस्ताव में PM नरेंद्र मोदी द्वारा डॉ. अम्बेडकर के पंचतीर्थ (महू, लंदन, नागपुर, दिल्ली, मुंबई) के विकास का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि यह नया कदम बाबासाहेब के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को और मजबूती देगा।
नई दिल्ली में डॉ बाबासाहब आंबेडकर की ‘महापरिनिर्वाण भूमि’ है, जहां उनका महापरिनिर्वाण (निधन) हुआ था। यहां पर भारत सरकार द्वारा एक भव्य एवं सुंदर “डॉ आंबेडकर राष्ट्रीय स्मारक” का निर्माण किया गया है। इस स्मारक की इमारत का डिजाइन एक खुले भारतीय संविधान की पुस्तक के रूप में है, और यह आकार “ज्ञान का प्रतीक” है। ”पंचतीर्थ” के रुप में भारत सरकार द्वारा विकसित किये जा रहे डॉ. आंंबेडकर के जीवन से संबंधित पांच स्थलों में से यह एक स्थान है।
1951 में केंद्रीय कानून मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने दिल्ली में 1, हार्डिंग एवेन्यू में सरकारी आवास छोड़ दिया और 26 अलीपुर रोड स्थित सिरोही के महाराजा के आवास में चले गए। बाबासाहेब 1951 से 1956 तक इस घर में रहे। वहीं 6 दिसंबर, 1956 को उनका निधन हो गया। इसलिए इस वास्तु को ‘महापरिनिर्वाण स्थल’ या ‘महापरिनिर्वाण भूमि’ के रूप में जाना जाता है।
इस घर को स्मारक में तब्दील करने की मांग को लेकर 12 साल तक का लंबा आंदोलन चला। बाद में जब अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार केंद्र में आई तो इमारत को मूल मालिक से ले लिया गया और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जन्म शताब्दी समारोह समिति ने 2 दिसंबर 2003 को इस घर को राष्ट्रीय स्मारक में बदलने का फैसला किया और वास्तु को स्मारक में बदल दिया।
इस स्मृति स्थल पर एक नए भव्य स्मारक बनाने के लिए एक नए स्मारक की योजना बनाई गई थी, 21 मार्च 2016 को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इस राष्ट्रीय स्मारक की आधारशिला रखी थी। दो साल बाद, 127वीं अंबेडकर जयंती की पूर्व संध्या पर, नरेंद्र मोदी ने 13 अप्रैल 2018 को स्मारक का लोकार्पण किया।
डॉ आंबेडकर नेशनल मेमोरियल का कुल क्षेत्रफल 7,374 वर्ग मीटर है। इस स्मारक पर करीब 200 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। यहां की इमारत में हर तरफ हरा रंग दिया गया है। स्मारक के प्रवेश द्वार पर 11 मीटर ऊंचा अशोक स्तंभ खड़ा है और इसके पीछे एक ध्यान केंद्र है।
स्मारक क्षेत्र में प्रदर्शनी और आधुनिक तकनीक से सुसज्जित एक संग्रहालय बनाया गया है। यहां बाबासाहेब के कार्यों की जानकारी देना, प्रदर्शनियों का आयोजन आदि जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस जगह पर बाबासाहेब की 12 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा, डिजिटल प्रदर्शनी, गौतम बुद्ध की ध्यानस्थ प्रतिमा है। 3डी इफेक्ट के जरिए बाबासाहेब सीधे अपने विचार प्रस्तुत करते देखे जा सकते हैं। यहां एक ध्यान केंद्र, बोधि वृक्ष और संगीतमय फव्वारा भी है।
डॉ. आंंबेडकर के जीवन से संबंधित इन पांच स्थलों को पंचतीर्थ के रूप में विकसित किया जा रहा है:
a. जन्म स्थली, महू
b. शिक्षा स्थली, लंदन
c. दीक्षा स्थली, नागपुर
d. महापरिनिर्वाण स्थली, दिल्ली
e. अंतिम संस्कार स्थली, मुम्बई