मैसाचुसेट्स- अमेरिका के मैसाचुसेट्स राज्य की गवर्नर मौरा टी. हीली ने एक आधिकारिक घोषणा जारी कर 14 अप्रैल को डॉ. बी.आर. आंबेडकर इक्वालिटी डे के रूप में मनाने की घोषणा की है। यह घोषणा डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर की जन्मजयंती के अवसर पर उनके समानता, सामाजिक न्याय, मानवाधिकार और गरिमा के योगदान को सम्मानित करने के लिए की गई है।
घोषणा में कहा गया है कि मैसाचुसेट्स विविध नस्लों और जातीय समूहों का घर है, जिसमें मूल अमेरिकी, अश्वेत, हिस्पैनिक, श्वेत, दक्षिण एशियाई और अन्य शामिल हैं। डॉ. आंबेडकर, जो 14 अप्रैल 1891 को भारत में जन्मे थे, दलित वर्ग के पहले उच्च शिक्षित और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली व्यक्ति थे। उन्होंने जीवनभर हाशिए पर रहने वाले वर्गों के अधिकारों की लड़ाई लड़ी। उनकी समानता और सामाजिक न्याय की कई विचारधारा कोलंबिया विश्वविद्यालय में शिक्षा के दौरान बनी, जहां उन्हें सम्मानित डिग्री भी प्रदान की गई।
डॉ. आंबेडकर को भारतीय संविधान का जनक माना जाता है, जो दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। वे स्वतंत्र भारत के पहले कानून और न्याय मंत्री भी थे। उन्होंने वकील, पत्रकार, शिक्षाविद्, अर्थशास्त्री, कानून निर्माता और राजनेता के रूप में बहुआयामी योगदान दिया। उन्हें भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया। उन्होंने आधुनिक भारत में बौद्ध धर्म की पुनरुत्थान भी किया, जिसमें करुणा और अहिंसा के सिद्धांतों पर जोर दिया गया।
बाबासाहब की जन्मजयंती पहले भी कई देशों में सम्मानित की जा चुकी है। भारत में 14 अप्रैल को अम्बेडकर जयंती के रूप में सार्वजनिक अवकाश के रूप में मनाया जाता है। कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह अवकाश है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर:
कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत ने 2021 में 14 अप्रैल को डॉ. बी.आर. आंबेडकर इक्वालिटी डे घोषित किया था।
कनाडा के बर्नाबी शहर ने 2020 में 14 अप्रैल को डॉ. बी.आर. आंबेडकर डे ऑफ इक्वालिटी मनाने का फैसला लिया था।
अमेरिका में न्यूयॉर्क सिटी ने 2025 में मेयर एरिक एडम्स द्वारा 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर डे घोषित किया था।
अमेरिका के अन्य राज्यों जैसे न्यू जर्सी, कोलोराडो और न्यू हैम्पशायर ने भी पहले इस दिन को इक्वालिटी डे या समानता दिवस के रूप में मान्यता दी है।
संयुक्त राष्ट्र (UN) में भी डॉ. आंबेडकर की जन्मजयंती का आयोजन कई वर्षों से होता रहा है, जहां उनके न्याय और समानता के योगदान को याद किया जाता है।
यह घोषणा डॉ. आंबेडकर के वैश्विक प्रभाव को दर्शाती है, जिनके विचार आज भी समानता और सामाजिक न्याय की लड़ाई में प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं।